पोलावरम बांध : सरकार की लेटलतीफी से चार हजार परिवार खतरे में, जमीन, खेती सब गंवाने की कगार पर

नयी दिल्ली/रायपुर. केन्द्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह आंध्रप्रदेश में गोदावरी नदी पर बनने वाली इंदिरा सागर पोलावरम परियोजना के संबंध में ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में जनसुनवाई करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी को नियुक्त करने के लिए तैयार है.

केन्द्र ने न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केन्द्र से पूछा था कि क्या पोलावरम परियोजना को लेकर वह इन दोनों राज्यों में जनसुनवाई करेगी. आंध्रप्रदेश में गोदावरी नदी पर बनने वाली पोलावरम परियोजना एक बहुद्देशीय ंिसचाई परियोजना है. इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है.

परियोजना का निर्माण आंध्रप्रदेश के पश्चिम गोदावरी और पूर्वी गोदावरी जिलों में चल रहा है और इसके जलाशय ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में भी फैले हैं. सुनवाई के दौरान केन्द्र ने न्यायालय को बताया कि आंध्रप्रदेश में 2005 में ही जनसुनवाई हुई है.

आंध्रप्रदेश की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि ओडिशा सरकार इस मुद्दे पर जनसुनवाई नहीं कराना चाहती है और ऐसे हालात में केन्द्र सरकार को इस कार्य के लिए स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त है.

पीठ ने केन्द्र के वकील से कहा, ‘‘हम लोकतंत्र में रह रहे हैं और आप यह नहीं कह सकते हैं कि जनता को कुछ दिक्कतें हैं लेकिन हम इसके लिए कुछ नहीं करेंगे और जनसुनवाई नहीं करेंगे.’’ वकील ने न्यायालय से कहा कि उन्होंने ओडिशा से जनसुनवाई करने को कहा है.


दूसरी ओर पोलावरम बांध से लगे छत्तीसगढ़ के एक दर्जन गांवों में बसे चार हजार परिवार खतरे में आ गए हैं. उनकी जमीन, खेती सब गंवाने की कगार पर हैं लेकिन सरकार ने या प्रशासन ने अभी तक उनकी सुध नही ली है और ना किसी प्रकार का मुआवजा देने की बात कही है. इससे आदिवासियों में क्रोध है और वे सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहा है. 

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