ब्लैकमेलिंग के लिए कम उम्र की 15-20 लड़कियों की जरूरत थी, यहां से उठा ले आई

मध्यप्रदेश के हनी ट्रेप मामले में रोज नए और चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है. आरती नाम की महिला ने गिरोह में शामिल युवतियों को बड़े बड़े लोगों के पास भेजा करती थी. इस खेल में कम उम्र की लड़कियों का ही उपयोग किया जाता था. हालांकि अभी पूछताछ में और नए तथ्य सामने आएंगे. 

श्वेता को ब्लैकमेलिंग के लिए कम उम्र की 15-20 लड़कियों की जरूर थी

हनी ट्रैप गैंग की मास्टरमाइंड आरती और श्वेता को ब्लैकमेलिंग के लिए कम उम्र की 15-20 लड़कियों की जरूरत थी। इसके लिए आरती ने राजगढ़ की छात्रा को कहा था कि वह अपनी सहेलियों को मनाकर भोपाल लाए। पहली बार छात्रा जब अपने गांव गई तो उसने सहेलियों से इस बारे में बात की और बताया कि जिनके पास ले चल रही हूं, वे पढ़ाई भी करवाएंगी। आरती और श्वेता की कारस्तानियां देखने के बाद दूसरी बार राखी पर वह गांव गई तो सहेलियों के पूछने के बावजूद उन्हें भोपाल ले जाने से इनकार कर दिया, ताकि इनकी जिंदगी बर्बाद न हो। 

पिता ने कहा- पढ़ने में थी होशियार, इनके चक्कर में गलत काम में फंसी

छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ने में काफी होशियार थी। उसे 10वीं में 4 विषय में विशेष योग्यता मिली थी। एक बार आरती ने घर आकर समझाया था तो मना कर दिया। फिर दूसरी बार आरती व श्वेता ने फोन कर बेटी को गांव के बाहर ही बुलवा लिया। उसे इतना गुमराह कर दिया कि वह कैसे भी उन दोनों के पास जाना चाहती थी। उसने जिद में 8 दिन तक खाना नहीं खाया। आखिर में मई महीने में हमने उसे भेजा। एक बार वे भोपाल गए तो आरती, बेटी के अलावा एक और लड़की थी। इन लोगों ने बेटी को एक्टिवा और तीन-चार मोबाइल दे रखे थे।

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