चावल के बाद अब केन्द्र ने की केरोसीन में कटौती, केन्द्र सरकार का छत्तीसगढ़ विरोधी फैसला : शैलेश नितिन त्रिवेदी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के कैरोसिन-मिट्टी तेल कोटे में कटौती पर कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि यह मोदी सरकार का एक और छत्तीसगढ़ विरोधी फैसला है। पहले दाल भात केन्द्रों का चांवल बंद किया। शक्कर कारखानों से शक्कर उठाना बंद किया। छत्तीसगढ़ के कैरोसीन मिट्टी तेल कोटे में कटौती जैसे गरीब विरोधी फैसलों से छत्तीसगढ़ को नुकसान पहुंचाया है। करीब 13 लाख राशन कार्डों के धारकों को कैरोसीन का वितरण प्रभावित हो गया।

त्रिवेदी ने अपने एक बयान में कहा कि उज्जवला योजना में 26.79 लाख कनेक्शन वितरित किए जा चुके है। केन्द्र सरकार की नीति अनुसार उज्जवला योजनान्तर्गत वितरित कनेक्शनों की संख्या में वृद्धि के आधार पर राज्य को केरोसिन का आबंटन 1.72 लाख लीटर के स्थान पर 1.15 लाख किलोमीटर कर दिया गया है। पहली तिमाही 28764 कि.लि. दिया गया, दूसरी तिमाही 17880 कि.लि. किया गया, जिससे 38 प्रतिशत की कटौती की गयी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 26 मार्च 2019 को पत्र लिखकर कैरोसीन की कोटा बढ़ाने की मांग की थी।

त्रिवेदी ने कहा है कि राज्य को आंबटित अपर्याप्त कोटे के कारण 12.90 लाख राशनकार्ड धारको को केरोसिन का वितरण नहीं हो पा रहा है। एलपीजी सिलेंण्डरों के रिफिल कीमत के युक्तियुक्तकरण होते तक तथा एलपीजी वितरकों की संख्या में पर्याप्त प्रसार होने तक ईधन के रूप में केरोसिन की आवश्यकता बनी रहेगी। केरोसिन की मात्रा में कटौती से छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों को अत्याधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

त्रिवेदी ने कहा है कि उज्जवला योजना के हितग्राहियों द्वारा यदि नियमित रूप से सिलेण्डरों को रिफिल कराया जाता तब उस परिस्थिति में केरोसिन का आबंटन कम किया जाना औचित्यपूर्ण होता। उज्जवला योजना के हितग्राहियों द्वारा सिलेण्डरों के रिफिल की संख्या का अवलोकन से स्पष्ट है कि वर्ष 2018-19 में कुल रिफिल कराए गए सिलेण्डरों की संख्या 25,23,664 मात्र है। जिससे यह स्पष्ट है कि प्रत्येक हितग्राही द्वारा प्रतिवर्ष औसतन एक ही सिलेण्डर रिफिल कराया  गया है।

सिलेण्डरों के रिफिल कम कराए जाने का प्रमुख कारण यह है कि रिफिल हेतु गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को सिलेण्डरों की पूरी कीमत, जो की राज्य में पहले रूपये 773 थी और अब और बढ़ गयी है, पर खरीदना पड़ता है। सब्सिडी की राशि रूपये 270.18 है, जो बाद में हितग्राही के बैंक खाते में आती है। गरीब परिवारों के लिए एकमुश्त इतनी राशि देना संभव नहीं होने तथा दूरस्थ अंचलों में एलपीजी वितरकों की संख्या में समुचित वृद्धि न होना कम रीफिलिंग के मुख्य कारण है।

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