मनेन्द्रगढ़ : पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित श्री पंचमुखी हर्बल गार्डन की 'मौत, नगर पालिका परिषद ने रखरखाव का बजट जारी नही किया

मनेन्द्रगढ़. हसदो नदी के तट पर स्थित प्रदेश का अपने तरह का पहला श्री पंचमुखी हर्बल गार्डन जिसके लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नगर पालिका प्रशासन को सम्मानित भी किया जा चुका है आज वही हर्बल गार्डन शासन-प्रशासन की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। देखरेख के अभाव में यहां के पेड़-पौधे सूख रहे हैं। 

पर्यटकों को लुभाने के लिए पत्थरों पर की गई नक्कासी अंतिम सांसें गिन रही है तो वहीं बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधा सब कुछ समाप्त हो चुकी है। नपा मनेंद्रगढ़ के उप अभियंता मुकेश दुबे का कहना है कि हर्बल गार्डन की दशा आपके द्वारा संज्ञान में लाई गई है, नपा द्वारा शीघ्र इसका रख-रखाव किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने व जड़ी-बूटियों के संरक्षण के उद्देश्य से हसदो गंगा तट की पुण्य भूमि पर करीब पंद्रह बरस पहले नगर पालिका प्रशासन द्वारा पंचमुखी हर्बल गार्डन स्थापित किया गया थामनेन्द्रगढ़ : पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित श्री पंचमुखी हर्बल गार्डन की 'मौत, नगर पालिका परिषद ने रखरखाव का बजट जारी नही किया । 

हसदो गंगा तट पर सैकड़ों की संख्या में फलदार, फूलदार वृक्ष तथा विभिन्न औषधीय गुणों से युक्त जड़ी-बूटियों को संचय कर हर्बल प्लांट लगाए गए। पंचमुखी हर्बल गार्डन के नाम से ख्यातिलब्ध इस गार्डन में दो दर्जन से भी अधिक औषधीय पौधों को लगाया गया। आंवला, घृत कुमारी, चिरायता, सर्पगंधा, बड़ी इलायची, ब्राह्मी, सिंदूर, पारिजात, लेमन ग्रास, सतावर, चित्रक, गुड़मार, सर्पगंधा, पिपरमेंट, लेडी पीपर, सफेद मूसली, अजवाईन, मौलश्री, आमा हल्दी, पुनरनवा, पथरचूर, स्टीविया, लाजवंती आदि हर्बल प्लांट के साथ फलों में विविध प्रजाति के आम, अमरूद, मोसम्बी, चीकू, लिची, आंवला, केला, बैर, काजू, बादाम, नींबू, जामुन, करौंदा के अलावे विविध प्रजातियों के आकर्षक और रंग-बिरंगे फूल गार्डन की शोभा में चार चांद लगाने के लिए लगाए गए थे।

 


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