राष्ट्रीय सेमीनार में मेकेनिकल इंजीनियर ने किया मुर्दे को जिंदा करने का दावा, विश्वास और अंधविश्वास को लेकर तकरार

जशपुरनगर. जिला प्रशासन ने दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन पर्यावरण और पुरातत्व के विषय पर आयोजित किया था, लेकिन इस सेमीनार में अंर्तराष्ट्रीय और राष्ट्र स्तरीय बृद्विजीवियों की उपस्थिति में कुछ ऐसा हुआ, जिसे देख और सुनकर सेमीनार में उपस्थित लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली।

इस सेमीनार में सांप के विषय पर प्रस्तुतीकरण चल रहा था। इस दौरान प्रस्तीकरण दे रहे ग्रीन नेचर वेलफेयर सोसायटी के कैसर हुसैन ने जैसे ही सर्पदंश के मामले में जड़ी-बूटी और झाड़-फूंक के भरोसे ना रह कर समय पर इलाज कराने की अपील की। सेमीनार में मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। इनका कहना था कि जड़ी-बूटी का प्रचलन मेडिकल साइंस के अस्तित्व में आने से पहले से चला आ रहा है। जो लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं, वे ही इसका विरोध करते हैं। पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास और अंधविश्वास को लेकर सत्र के बीच में ही तकरार हो गई।

जीएनएसडब्लू के कैसर हुसैन ने अपने प्रस्तुतीकरण के अंत में बताया कि जिले में 80 प्रतिशत सर्पदंश का प्रकरण जमीन में सोने और 90 प्रतिशत मौत जड़ी-बूटी और झाड़-फूंक के चक्कर में जाती है। इस दौरान उन्होनें कुछ सांपों की तस्वीर दिखाते हुए उनके विषहीन और कम विष होने का दावा करते हुए कहा कि ओझा और वैद्य का कार्य करने वाले इन्हीं सांपों के काटे जाने के मामलों की आड़ लेकर अपनी दुकानदारी चलाते हैं। प्रस्तुतीकरण समाप्त होते ही सेमीनार में उपस्थित अगरिया समाज के अगरिया ने जीएनएसडब्लू के तथ्यों का विरोध ब्राउन्स बेक प्रजाति का सांप कम जहर वाले सांपों के श्रेणी में आता है।

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