बस्तर एसपी—लखमा मामला : कवासी लखमा को मिला पूर्व भाजपा सांसद सोहन पोटाई का समर्थन, प्रदेश आदिवासी समाज ने एसपी पर कार्रवाई चाही

रायपुर. आबकारी मंत्री कवासी लखमा के पक्ष में अब प्रदेश का आदिवासी समाज उतर आया है। सर्व आदिवासी समाज एवं सर्व छत्तीसगढिय़ा समाज ने आदिवासी वर्ग के मंत्री श्री लखमा के सम्मान, वरिष्ठता और सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का आरोप लगाते हुए सुकमा एसपी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि एसपी ने तबादले के नाम पर आदिवासी मंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया में दुर्भावानावश काम किया है। 

आदिवासी नेता, पूर्व सांसद सोहन पोटाई व अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को यहां एक पत्रवार्ता में कहा कि सुकमा जिले में घटित पुलिस प्रशासन के घमंडपूर्वक अडिय़ल रवैए के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज एवं सर्व छत्तीसगढिय़ा समाज को आगे आना पड़ा। उन्होंने बताया कि मंत्री श्री लखमा द्वारा सुकमा एसपी जितेंद्र शुक्ला को पिछले दिनों एक पत्र लिखा गया था, जिसमें दुर्गम क्षेत्र फुलबगड़ी में लंबे समय से पदस्थ एक निरीक्षक को स्वास्थ्यगत कारणों से छिंदगढ़ या तोंगपाल में पदस्थ करने कहा गया था। एसपी श्री शुक्ला ने मंत्री का सिफारिश पत्र मिलने के बाद उक्त निरीक्षक का तबादला दुर्भावनावश डेढ़ सौ किमी दूर मरईगुड़ा कर दिया। वहीं मंत्री को अपने कार्य क्षेत्र की जानकारी असंसदीय ढंग से भेजी गई। 

आदिवासी नेताओं ने कहा है कि एसपी श्री शुक्ला ने उस पत्र के साथ नक्सल समस्या जैसे गंभीर विषय को जोड़कर उसे सोशल मीडिया में प्रसारित किया। इतना ही नहीं, राजनैतिक मामलों में उलझाने का प्रयास भी किया, जो अखिल भारतीय सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि पूर्व में सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर आदिवासी समाज के अधिकारियों-कर्मचारियों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई हो गई थी। उनकी मांग है कि संबंधित एसपी के खिलाफ भी इसी तरह से तुरंत कार्रवाई की जाए। कार्रवाई न होने पर यह माना जाएगा कि प्रशासन में आज भी उच्च वर्ग के अफसरों का दबदबा है। उन्होंने इस घटना से प्रदेश के आदिवासी समाज आहत बताते हुए संबंधित एसपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 

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