Big_Breaking : संसद में गूंजा छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य का मुददा, 'स्वास्थ्य सुविधाएं लचर, बजट उंट के मुंह में जीरा समान



अनिल द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार.


संसद में पेश हुई कैग' की रिपोर्ट में कहा गया है कि असम, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की तरह छत्तीसगढ़ राज्य भी स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में काफी पीछे है तथा वह संयुक्त राष्ट्र के दिए लक्ष्य को पूरा नही कर सका है. समिति ने यह भी माना कि राज्य जिस तेजी से आर्थिक-दर में विकास कर रहा है, उस तेजी से स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पैसा आबंटित नही किया गया. नतीजन लोगों को स्वास्थ्यगत सुविधाएं नहीं मिल सकीं.

सोमवार को संसद में पेश की गई कैग' रिपोर्ट में कहा गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय 2015-16 से बढ़ रहा था, लेकिन सकल घरेलू उत्पाद 1.02-1.28% के मुकाबले अब सिकुड़ता जा रहा है. यानि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकार को और ज्यादा बजट देना चाहिए क्योंकि यह जनहित से जुड़ा सबसे प्राथमिक मुददा है.

केन्द्र सरकार की तरफ से एसडीजी' जांच एजेंसी जिसमें नीति आयोग और राज्य की सरकारें शामिल हैं, ने राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं का सर्वेक्षण किया और जो आंकड़े जुटाए गए, उसके आधार पर कैग' ने यह रिपोर्ट जारी की है.
एसडीजी के 17 उद्देश्यों में यह भी शामिल है कि सभी राज्यों में 2030 तक गरीबी, भूख और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं खत्म कर दी जाएं पर राज्य सरकारों के सहयोग के बगैर यह संभव नही है.

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है. 2019-20 में स्वास्थ्य के लिए केंद्रीय आवंटन लक्ष्य से बहुत कम था। इसी तरह राज्यों में, राज्यों के कुल खर्च के प्रतिशत के रूप में स्वास्थ्य व्यय मात्र 3.29 से 5.32% तक था जिसमें काफी वृद्धि की आवश्यकता है.

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 2030 तक लक्ष्य हासिल करने के लिए वित्तीय संसाधनों को पेश करना एक चुनौतीपूर्ण काम है. वित्त मंत्रालय और राज्य सरकारों को एसडीजी को लागू करने के लिए राष्ट्रीय बजट में एसडीजी से संबंधित वित्तीय संसाधनों को एकीकृत करना शेष है. ऑडिटर के अनुसार, समस्याएं धन के आवंटन से परे थीं. इसी तरह जो डेटा राज्य सरकारों द्वारा दिये गये, वे समान रूप से और नियमित तौर पर उपलब्ध नही थे.

2030 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीति आयोग द्वारा कदम उठाये जा रहे हैं परंतु कैग की रिपोर्ट में इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020, 2025 और 2030 तक स्वास्थ्य सुविधाओं के लक्ष्य हासिल करने के लिए रोडमैप बनाया जाना चाहिए जोकि मील के पत्थर साबित होगा.

राज्यों ने अभी तक नीतिगत दस्तावेज तैयार नहीं किए हैं. नीति आयोग और चयनित राज्यों द्वारा किए गए लक्ष्यों/लक्ष्यों की मैपिंग अभी भी जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चयनित राज्यों में एसडीजी और पहल के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के प्रयास व्यापक, केंद्रित या निरंतर नहीं थे।

ऑडिटर्स ने अपनी सिफारिशों में कहा कि एसडीजी को लागू करने के लिए अच्छी तरह से परिभाषित मील के पत्थर के साथ एक व्यापक चार्टर और कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए। इस पर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला.

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संसद कैग' की रिपोर्ट स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में काफी पीछे

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