Special_Report : विधायक बृजमोहन अग्रवाल के इस कदम से भाजपा दो लोकसभा सीट पर मजबूत हुई, कांग्रेस में खलबली मची

महासमुन्द. यहां के पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा के भाजपा में शामिल होते ही महासमुन्द लोकसभा में राजनीतिक भूचाल आ गया हुआ है। खलबली कांग्रेस में मची है तो वहीं भाजपा की बांछें खिल गई हैं. डॉ. चोपड़ा के भाजपा प्रवेश के बाद पार्टी की जीत की राह आसान हो गई है. और इसका श्रेय चुनावी रणनीतिकार, भाजपा विधायक श्री बृजमोहन अग्रवाल को दिया जा रहा है.

डॉ. चोपड़ा से जुड़े समर्थकों के मुताबिक भैया काफी दिनों से बृजमोहन अग्रवाल के संपर्क में थे और भाजपा में आना चाह रहे थे लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह का खेमा इसमें अड़ंगे डाल रहा था. हालांकि इसके उलट डॉ. चोपड़ा का प्रवेश डॉ. रमनसिंह के आतिथ्य में ही हुआ परंतु भाजपा—वापसी की रणनीति भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने ही बनाई. पार्टी से जुड़े नेताओं के मुताबिक दोनों के बीच अच्छी टयूनिंग है क्योंकि दोनों एबीवीपी' से निकले हुए नेता हैं.

डॉ. चोपड़ा विधानसभा चुनाव के पहले भी आ सकते थे लेकिन उन्हें टिकट की गारंटी चाहिए थी जो पार्टी नेता नही दे रहे थे. हालांकि बृजमोहन अग्रवाल ने उस समय भी उनके लिए कवायद की थी लेकिन तब पार्टी ने इंकार कर दिया था. फिर डॉ. चोपड़ा भी कहीं न कहीं रमन सरकार से आहत महसूस कर रहे थे. एसपी के द्वारा पिटाई काण्ड ने डॉ. चोपड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के बीच गहरी खाई भी बना दी थी जिसे पाटने का काम बृजमोहन अग्रवाल ने किया और अंतत: डॉ. चोपड़ा पार्टी में वापस आ गए. उनके बड़े भाई मोहन चोपड़ा ने भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाई, ऐसा माना जाता है.

इधर, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा के भाजपा प्रवेश के बाद महासमुंद सीट पर अब भाजपा की स्थिति और मजबूत हो गई है हालांकि हार के बादल अभी भी छंटे नही हैं लेकिन कई कार्यकर्ताओं, समर्थकों व नेताओं को बृजमोहन अग्रवाल खुद समझा रहे हैं कि पार्टी को यह सीट जिताकर देना ही होगा. ये वही भाजपाई हैं जो लंबे समय से भाजपा के लिए मेहनत करके भाजपा को टॉप में लाकर खड़ा करने वाले रहे हैं लेकिन पार्टी के बाकी नेताओं के व्यवहार के चलते निष्क्रिय हो गए थे.

दूसरी ओर कुछ बड़े नेेता सोशल मीडिया आदि के माध्यम से डा. चोपड़ा को बधाईयां दे रहे हैं और उनके भाजपा में शामिल होने का स्वागत कर रहे हैं लेकिन अंदरूनी तौर पर भाजपा इस सदमें में है कि अपनी कद काठी से भी कहीं अधिक राजनीतिक कद वाले चोपड़ा के भाजपा के आने के बाद उनकी एक नहीं चलेगी। नाम न छापने की शर्त पर भाजपाई कह रहे हैं कि जिसने पाटी से बगावत कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकीं, उसे पार्टी में शामिल करने से पहले कार्यकताओं और पदाधिकारियों से आला नेताओं ने पूछा तक नहीं। डा. चोपड़ा के आगमन को लेकर राजनीतिक गलियारे में कहीं पर भाजपा को लाभ तो कहीं पर नुकसान की बातें हो रही हैं।

दूसरी ओर राजधानी रायपुर के दबंग निर्दलीय पार्षद मृत्युंजय दुबे के भाजपा प्रवेश में भी भाजपा विधायक श्री बृजमोहन अग्रवाल का बड़ा हाथ माना जा रहा है. लोकसभा प्रत्याशी सुनील सोनी की जीत सुनिश्चित करने के लिए यह कदम तुरूप का एक्का माना जा रहा है क्योंकि निर्दलीय पार्षद मृत्युंजय दुबे का इस इलाके में खासा जनाधार है और यह वार्ड वैसे भी भाजपा समर्थक माना जाता है. श्री दुबे और बृजमोहन अग्रवाल के बीच पुराना संबंध भी है इसलिए महाराज के भाजपा प्रवेश की राह आसान हुई.

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