बैंक की लापरवाही के लिए उपभोक्ता जवाबदार नहीं, बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला

बिलासपुर. पराक्रम्य लिखित अधिनियम की धारा 0 के अंतर्गत धारक के सद्भाव की कसौटी पर खरे उतरने पर बैंक ड्राफ्ट का भुगतान धारक को किया जाना आवश्यक है. जेएमए स्टोर्स जमशेदपुर व बिलासपुर ब्रांच द्वारा ट्रक के चेचिस व अन्य पाटर््स का व्यवसाय किया जाता है.

पटना निवासी रमेश कुमार ने इस स्टोर से टाटा ट्रक का चेचिस खरीदने 3 लाख 49062 रु. का ड्राफ्ट पीएनबी पटना द्वारा जारी कराया. जिसे बिलासपुर ब्रांच के लिए इलाहाबाद बैंक में जमा कराया गया. कुछ समय बाद पीएनबी धनिया ब्रांच ने कहा कि, हमारी शाखा ने यह ड्रॉफ्ट जारी ही नहीं किया है.

इसी बीच डीलर द्वारा स्पेयर की डिलीवरी भी कर दी गई. अब पीएनबी ने सिविल कोर्ट में परिवाद जेएमए स्टोर व रमेश कुमार के खिलाफ पेश कर दिया. ट्रायल कोर्ट ने 15-4-1998 को 4,49,853 रु. की डिक्री जेएमए सेंटर के खिलाफ पारित कर दी. इसके विरुद्ध अब जेएमए ने हाईकोर्ट में अपील की. जस्टिस गौतम भादुड़ी की एकलपीठ में सुनवाई हुई.

एडव्होकेट राजीव श्रीवास्तव के माध्यम से पेश अपील में कहा गया कि, रमेश कुमार ने वह वाहन (चेचिस) खरीदा है और ड्राफ्ट के लिए अपीलार्थी ही जवाबदार नहीं है. अगर बाद में बैंक ने जो ड्रॉफ्ट गुमने या चोरी होने की बात कही है उसे पहले ही स्वयं बैंक को स्पष्ट कराना था.

पराक्रम्य लिखित अधिनियम की धारा 0 के अंतर्गत उपभोक्ता स्वयं बैंक की किसी लापरवाही के लिए जवाबदार नहीं है. इसके साथ ही सुनवाई पूरी कर जस्टिस गौतम भादुड़ी ने सिविल द्वारा पारित डिक्री आदेश अपास्त कर दिया. अपीलार्थी की अपील मंजूर करली गई.

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