ऐसे मूर्ख सलाहकार होंगे तो राहुल गांधी से आप चतुराई कि उम्मीद कैसे कर सकते हैं : आनंद पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार आनंद पाण्डेय जी की फेसबुक वॉल से.


पराजित कांग्रेस और परास्त राहुल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अब पार्टी के कारण राहुल पस्त हुए या राहुल के कारण पार्टी इस हाल में पहुंची ये शोध और खोज का विषय है। अभी तो मैं आपको सिर्फ एक ऐसा रोचक किस्सा बताता हूं जिसे पढ़कर आप चौंक जाएंगे।

….लगभग एक साल पुरानी बात है। मेरा ठिकाना तब पूरी तरह दिल्ली ही हुआ करता था। एक दिन हम – मैं और मेरे दो सीनियर साथी, संतोष कुमार और मुकेश कौशिक कांग्रेस के एक जनरल सेक्रेट्री के साथ चाय पर गपशप लड़ा रहे थे। उसी वक़्त कांग्रेस ने अपने अधिवेशन में बाकायदा एक प्रस्ताव पास करके ई वी एम की बजाय बेलेट पेपर से चुनाव करवाने की बात कही थी। जाहिर है गपशप करते करते बात ई वी एम पर आ गई।

मैने जब पूछा कि चुनाव आयोग ने जब ई वी एम को हैक करने की चुनौती दी थी तब तो कांग्रेस आगे नहीं आई। फिर बार बार इसका रोना क्यों रोया जाता है। मैं बोला कांग्रेस तो इतनी बड़ी पार्टी है। देश विदेश में उसके संबंध – संपर्क हैं। न संसाधनों की कमी है न पैसों की। काहे नहीं विदेशों से विशेषज्ञ बुलाते और इंडिया गेट पर एक डेमोंस्ट्रेशन करके जनता को बताते की देखो यूं होती है ई वी एम हैक। मेरा इतना कहते ही सेक्रेट्री साहब बोले – नहीं भाई साहब आप मोदी को नहीं जानते। बड़ा बदमाश आदमी है। वो यूं थोड़ी न मशीन हैक करता है। मुझे मालूम है – गुजरात में जब मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम में पहुंच जाती थीं तब वो सेटेलाइट के जरिए उन्हें हैक करवा देता था। मुझे और मेरे दोनों साथियों को उनकी इस मूर्खता पूर्ण तर्क पर बड़ा आश्चर्य हुआ।। थोड़ी देर बहस भी हुई और फिर बात आई -गई हो गई।

फिर तुरंत ही अगला मुद्दा नोटबंदी का आ गया। सेक्रेट्री साहब फिर मोदी को गरियाने लगे। इस बार उनके निशाने पर अमित शाह भी थे। बोले – देखिए कितना बड़ा और आलीशान ऑफिस बनाया है बीजेपी ने दिल्ली में। आप लोगों लोगों को शायद मालूम नहीं होगा – ये दोनों मिलकर नकली नोटों का धंधा करते हैं। हम एकदम से चौंके… मैने पूछा, भाई साहब आप क्या कह रहे हैं हम समझ नहीं पाए… क्या मोदी और शाह नकली नोटों का कारोबार करते हैं? हां भाई साहब बिल्कुल । मुझे मालूम है। ये दोनों जब गुजरात में थे तब से ये कर रहे हैं ।

उस दिन के लिए उनका इतना बौद्धिक हमारे लिए बहुत पर्याप्त था। मैने अपने साथियों से इशारों ही इशारों में बात की और कहा चलो भैया….कहां फंस गए। हम तत्काल सेक्रेट्री साहब से विदा ले चल पड़े।

बाद में हम लोग कई दिन तक इस मीटिंग की चर्चा करते रहे और सेक्रेट्री साहब कि मूर्खता पर हंस – हंस कर सोचते रहे कि जब ऐसे मूर्ख सलाहकार होंगे तो राहुल से आप चतुराई कि उम्मीद कैसे कर सकते हैं?


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