सीबीएसई' स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताब प्रतिबंधित,12 महीने की फीस लेने वाले स्कूल नपेंगे, पालक संघ सरकार से नाखुश

अपर कलेक्टर ने जिले के सभी सीबीएसई स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक लेकर 12 बिन्दुओं फैसला सुनाया। स्कूलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि निजी प्रकाशकों की किताब चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। अभिभावकों से सिर्फ 10 महीने का ही फीस लेनी होगी। वार्षिक शुल्क के नाम पर अधिकतम दो हजार से अधिक नहीं लेना है।

कलेक्टर कार्यालय में अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक शुरू हुई। जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक संचालक, सहायक जिला परियोजना अधिकारी ने वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। अपर कलेक्टर ने छात्रों से ली जाने वाली वार्षिक शिक्षण शुल्क एवं अन्य शुल्क के निर्धारण के संबंध मे प्राचार्यों से चर्चा की। कहा कि स्कूल दो हजार रुपये से अधिक वार्षिक शुल्क नहीं लेंगे। यदि ऐसा किया गया तो इसे आदेश की अवहेलना माना जाएगा। इसके अलावा निजी प्रकाशकों की किताब के लिए अभिभावकों पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा। केवल एनसीईआरटी कि किताब से पढ़ाई होगी।

प्रशासन ने एक तरह से स्कूलों पर शिकंजा कसने दावा किया है। जबकि अभिभावक इसे महज खानापूर्ति मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह अन्याय है। प्रशासन ने वार्षिक शुल्क को भले दो हजार में सिमटा दिया लेकिन अन्य दरवाजे खोल दिए हैं। जिससे स्कूलों की मनमानी नहीं रुकेंगी।

12 बिन्दुओं पर यह निर्णय

1. प्रत्येक स्कूल प्रायमरी कक्षा से हायर सेकेंडरी तक की कक्षाओं के लिए सभी विषयों की एनसीईआरटी की ही पुस्तकें चलाना अनिवार्य है। सपोर्टिंग रूप में किसी भी अन्य प्रकाशन की पुस्तकें नहीं चला सकते।
2. नर्सरी केजी कक्षाओं के लिए सभी स्कूल जिन प्रकाशक की किताबें चलाएंगे। उसकी सूची सत्र आरंभ के 2 माह पहले डीईओ कार्यालय भेजेंगे।
3. सत्र 2020-21 में एनसीईआरटी पुस्तकों के अलावा अन्य प्रकाशकों की सपोर्टिंग पुस्तकें चलाई जाना है, उसकी सूची 3 माह पहले डीईओ कार्यालय भेजी जाए।
4. स्कूल साल में केवल 10 माह की फीस ही ले सकेंगे।
5. पालक समिति का गठन करें और प्रत्येक 2 माह में आवश्यक रुप से समिति की बैठक हो।
6. गणवेश और बधाों के उपयोग सामग्री की सूची स्कूल लगने के 2 माह पहले शिक्षा विभाग भेजें।
7. शाला प्रबंध समिति की बैठक जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी व प्रतिनिधी की उपस्थिती में अनुमोदन के बाद ही शिक्षण शुल्क का निर्धारण स्कूल संचालक करें। यदि समिति की सर्व सम्मति से सकारण शुल्क में वृद्घि करने आवश्यक है तो वह न्यूनतम हो।
8. सभी स्कूल सत्र 2017-18 एवं 2018-19 का मदवार शुल्क विवरण, सत्र 2016-17 एवं 2017-18 के आडिट रिपोर्ट के साथ 3 दिन में डीईओ कार्यालय में प्रस्तुत करें।
9. स्कूल में कार्यरत शिक्षक, कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता के साथ पूरी जानकारी शिक्षा विभाग में 3 दिन में भेजें।
10. स्कूल बसों के चालकों, कंडक्टरों और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों का पुलिस बेरीफिकेशन कराकर जानकारी भेजें।
11. स्कूल संचालक 3 दिनों में सीबीएसई मान्यता की प्रति भेजें।
12. पालकों की सहमति से पांच वर्षों में ही गणवेश में बदलाव कर सकते हैं।

इन पर लगाया लगाम
-पंजीयन शुल्क केवल पहले एडमिशन के समय ही लेंगे उसके बाद कभी नहीं।
-डेली डायरी व आइकार्ड की राशि साल में एक बार।
-शिक्षण शुल्क वार्षिक।
-परीक्षा शुल्क वार्षिक।
खेल शुल्क वार्षिक।
-क्रियाकलाप शुल्क वार्षिक।
-प्रयोगशाला राशि वार्षिक।
-लाइब्रेरी शुल्क वार्षिक।
-कम्प्यूटर स्मार्ट क्लास की राशि साल में तब जब स्कूल में ये हो।
-निर्धन छात्र कल्याण निधी वार्षिक।
-वाहन शुल्क दूरी के हिसाब से माह में।
प्रवेश शुल्क प्रवेश के समय एक ही बार।
सुरक्षा निधी वापिसी योग्य।
वार्षिक शुल्क वार्षिक अधिकतम 2000 रुपये।

सर्व पालक संघ अब जिला प्रशासन के निर्णय के बाद नए सिरे से रणनीति में जुट गया है। अभिभावक अनिल कुमार पाठक, पनव ताम्रकर और मनीष अग्रवाल का साफ कहना है कि इस निर्णय से बिल्कुल साफ हो गया कि सरकार भी स्कूलों से मिली हुई है। अब केवल बाल संरक्षण आयोग और न्यायालय पर भरोसा है। इस तरह से खानापूर्ति कर स्कूलों को नई दुकान खोलने मौका दिया है।

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सीबीएसई स्कूल प्राचार्यों की बैठक निजी प्रकाशकों की किताब

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