कांग्रेस इतनी कमजोर हो गई है कि राजनांदगांव में उसे कोई प्रत्याशी नहीं मिला, पैराशूटर हैं करूणा शुक्ला

जब वास्तव में अटल जी की अस्थियां रायपुर लाई गई थी तब कांग्रेस के भी कई बड़े नेता श्रद्धांजलि देने पहुचे थे जिनमें नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा महापौर प्रमोद दुबे लेकिन अगर कोई नही आई इस समय तो वो थी अटल जी की भतीजी करुणा जी
——

किसी पार्टी में रहना किसी पार्टी के लिए काम करना कोई गलत नही अपनी अपनी वैचारिक सोच से कोई किसी पार्टी में रहकर अथवा उसकी विचारधारा से प्रभावित होकर किसी न किसी रूप में जुड़ा रहता है किंतु पिछले कुछ दिनों से जिस तरह सिर्फ अटल जी की भतीजी होने के मात्र कारण की वजह से कांग्रेस ने करुणा शुक्ला जी का उपयोग करना आरम्भ किया और फिर अब उन्हें राजनांदगांव से प्रदेश के मुखिया डॉ रमन सिंह जी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है, सीधे सीधे इशारा करता है कि कही न कही करुणा जी को अब कांग्रेस बली का बकरा बनाने जा रही है.

1993 में विधानसभा फिर 2004 में लोकसभा के लिए करुणा जी चुनी गई भारतीय जनता पार्टी के दिये अवसर की वजह से 2009 के चुनावों में करुणा जी को फिर भाजपा ने मौका दिया लेकिन इस बार करुणा जी कांग्रेस के चरणदास महंत से हार गईं. भारतीय जनता पार्टी ने संघठन में भी पर्याप्त अवसर करुणा जी को पूरे सम्मान से दिया महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुनाव कोर समिति की प्रमुख सदस्य कोर कमेटी की प्रमुख मेम्बर और बहुत से सम्मानजनक दायित्व लेकिन जो कांग्रेस पानी पी.पीकर अटल जी को कोसती थी जो अटल जी की विचारधारा की धुर विरोधी थी.

करुणा ने जी अटल जी के जीते जी उनके विचारों की हत्याकर कांग्रेस प्रवेश किया खैर उसमे कोई गुरेज नही लेकिन बदले में क्या मिला. कांग्रेस में करुणा जी को एक बार अटल जी के स्मारक के लिए एकत्रित मिट्टी को झूठा अस्थि कलश बताकर उनको आगे करके भाजपा कार्यालय में प्रदर्शन जिसमे खुद कांग्रेस पार्टी को शर्मशार होना पड़ा. करुणा जी को इस प्रदर्शन से ग्लानि हुई की नही, नही पता क्योकि जब वास्तव में अटल जी की अस्थियां रायपुर लाई गई थी तब कांग्रेस के भी कई बड़े नेता श्रद्धांजलि देने पहुचे थे जिनमें नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा महापौर प्रमोद दुबे लेकिन अगर कोई नही आई इस समय तो वो थी अटल जी की भतीजी करुणा जी लेकिन हा घेराव करने जरूर आ गई.

कांग्रेस पार्टी चाहती तो करुणा जी को पूरा सम्मान देते हुए उन्हें राज्यसभा का सदस्य जरूर बना सकती थी लेकिन उन्हें तो उनका उपयोग बस करना है. अब राजनांदगांव लोकसभा सीट से कांग्रेस ऐसे चेहरे के सामने खड़ा की है जहां उनकी हार निश्चित है. बस कितने मतों से होती है हार यह देखना है कांग्रेस चाहती तो करुणा जी को किसी सुरक्षित सीट से लड़ा सकती थी लेकिन जब मंशा उपयोग की हो तो फिर करुणा जी का हित थोड़े सोचेगी कांग्रेस उन्हें किसी जनप्रतिनिधि के रूप में नही देखना चाहती कांग्रेस बस यही वजह उन्हें बलि का बकरा बना कर कांग्रेस इस चुनाव में उनका उपयोग कर रही है.

Tags

Karuna shukla Raman singh BJP Congress Rajnandgaon

Related Articles

More News