कांग्रेस भवन में मंत्री बैठक ले रहे थे और विधायक एफआइआर कराने पहुंच गए, कांग्रेस में गुटबाजी उफान पर

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर तीन दिन पहले शहर व जिला कांग्रेस कमेटी ने भाजपा नेता सुब्रम्मणयम स्वामी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एफआइआर दर्ज कराने आवेदन दिया था। तब बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ थाना परिसर में जुट गई थी।

तीन दिन बाद एक बार फिर शहर में एफआइआर की राजनीति दिखाई दी। शहर विधायक शैलेष पांडेय व पीसीसी के सचिव पंकज सिंह कुछ समर्थकों के साथ सिविल लाइन थाने पहुंचे व एफआइआर की राजनीति शुरू की। पीसीसी के निर्देशों से अलग राह पकड़ने वाले विधायक व एक पदाधिकारी की इस राजनीति को लेकर एक बार फिर अटकलबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेसी दिग्गजों के बीच भीतर ही भीतर पनप रही गुटबाजी मंगलवार को सतह पर आ गई ।

शहर विधायक व पीसीसी के सचिव की एफआइआर की इस राजनीति को लेकर दिग्गज कांग्रेसी भी कुछ ठीक नहीं मान रहे हैं । खास बात ये कि जिस वक्त ये दोनों नेता अपने कुछ समर्थकों के साथ सिविल लाइन थाने पहुंचकर यह राजनीति कर रहे थे उसके ठीक पहले कांग्रेस भवन में उद्योग मंत्री कवासी लखमा की अगुवानी करने के बाद उनकी नसीहत भी सुनी।

मंत्री लखमा जब दिग्गज कांग्रेसी नेताओं को गुटबाजी से दूर रहने और पार्टी को मजबूत करने की समझाइश दे रहे थे तब नगर विधायक शैलेष पांडेय उनके बाजू में और कुछ ही दूरी पर पीसीसी सचिव पंकज सिंह बैठे हुए थे। दोनों नेता उनकी बातों को बखूबी सुने भी समर्थन में हामी भी भरी । मंत्री की नसीहत सुनने के बाद दोनों कांग्रेस भवन से निकले और सिविल लाइन थाने पहुंच गए। यहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ टिप्पणी करने वाले भाजपा नेता स्वामी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने आवेदन देने की राजनीति शुरू की।

जिस वक्त ये दोनों नेता सिविल लाइन थाना में थे मंत्री लखमा विधायक पांडेय को खोज रहे थे। उन्होंने कांग्रेसी नेताओं से पूछा भी विधायक कहां चले गए । पर किसी को पता ही नहीं चला । जब सिविल लाइन थाने की राजनीति की जानकारी मिली तब जिले की कांग्रेसी राजनीति में उबाल सा आ गया। कांग्रेस की आंतरिक गुटीय राजनीति खुलकर सामने आ गई । पीसीसी के निर्देशों की इस तरह धज्जियां उड़ते देख दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने तीखी टिप्पणी भी की । हालांकि किसी ने मुखर होकर अपनी बात नहीं की। कारण भी साफ है । पीसीसी सचिव पंकज सिंह पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव के करीबी होने के कारण जिले में उनके खास सिपहसालार भी हैं। सत्ताधारी दल के एक कद्दावर मंत्री के खास सिपहसालार के खिलाफ खुलकर टिप्पणी करने से कांग्रेसी दिग्गज बचते रहे ।

सत्ताधारी दल के ही एक धड़े द्वारा पीसीसी के निर्देशों के बहाने की जा रही गुटबाजी को लेकर कांग्रेसी नेता हैरत में है। सामने नगरीय निकाय चुनाव है। ऐसे में किस तरह निकायों में कांग्रेस कब्जा करेगी इसे लेकर भी चर्चा का दौर शुरू हो गया है।

दो दिन पहले ही शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नरेंद्र बोलर की अगुवाई में शहर कांग्रेस कमेटी कार्यकारिणी ने अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। पार्टी फोरम में अपनी बात रखने की नेताओं को समझाइश भी दी गई थी। शहर कांग्रेस कार्यकारिणी की चेतावनी भी बेअसर हो गई है।

पीसीसी के निर्देश पर स्वामी के खिलाफ दो दिन पहले ही जिला कांगे्रस कमेटी के बैनर तले सिविल लाइन थाने में एफआइआर दर्ज कराने आवेदन दिया गया है । प्रदेशभर में एफआइआर दर्ज कराया गया है। आज किसके निर्देश पर यह हुआ मुझे जानकारी नहीं है। फिलहाल मैं निजी काम के चलते शहर से बाहर हूं।

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