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अर्थव्यवस्था में संकुचन का यह छठा अवसर, तब भी आई थी अर्थव्यवस्था में गिरावट

दिल्ली। इस साल की जीडीपी पर बड़ा असर पड़ने वाला है। इस साल 5.3 प्रतिशत तक जीडीपी गिर सकता है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि देश के इतिहास में यह जीडीपी की सबसे निचली वृद्धि दर होगी और अर्थव्यवस्था में संकुचन का यह छठा अवसर होगा। ऐसे में पूरे वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक गतिविधियों के सामान्य होने की उम्मीद नहीं है। इससे पहले वित्त वर्ष 1979-80 में आर्थिक वृद्धि दर सबसे निचले स्तर पर थी। उस समय देश की आर्थिक वृद्धि दर शून्य से 5.2 प्रतिशत नीचे थी। रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी की वजह से उत्पादन की रफ्तार और इसके स्तर पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसकी वजह से आपूर्ति और व्यापार शृंखला टूट गई। विमानन, होटल और आतिथ्य क्षेत्र में गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं। इससे पहले वित्त वर्ष 1957-58, 1965-66, 1966-67, 1972-73 और 1979-80 में भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट आई थी। अर्थव्यवस्था की स्थिति सामान्य होने की वजह से अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर्ज की जाएगी। सरकार ने कोरोनावायरस के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए 12 मई, 2020 को 20.97 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 10 प्रतिशत) के बराबर आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी।

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