छत्तीसगढ़

पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने वैक्सीनेशन में तेजी लाने पीएम मोदी को दिया सुझाव, लिखा पत्र

दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में कोविड-19 के हालात पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को पत्र लिखा और इस बात पर जोर दिया है कि महामारी से मुकाबले के लिए टीकाकरण को बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने एचआईवी/एड्स से निपटने के प्रयासों की तरह टीकों के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग प्रावधान लागू करने समेत अन्य सुझाव प्रधानमंत्री को दिये।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि केवल कुल संख्या को नहीं देखना चाहिए बल्कि कितने प्रतिशत आबादी को टीका लग चुका है, इसे देखा जाना चाहिए।
श्री सिंह ने अपने पत्र में लिखा, “कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में टीकाकरण बढ़ाने के प्रयास अहम होने चाहिए। हमें यह देखने में दिलचस्पी नहीं रखनी चाहिए कि कितने लोगों को टीका लग चुका है, बल्कि आबादी के कितने प्रतिशत का टीकाकरण हो चुका है, यह महत्वपूर्ण है।“
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अभी केवल आबादी के छोटे से हिस्से का ही टीकाकरण हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही नीति के साथ हम इस दिशा में बेहतर तरीके से और बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा, “हमें महामारी से लड़ने के लिए बहुत सी चीजें करनी होंगी, लेकिन इस प्रयास का बड़ा हिस्सा टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत करना होना चाहिए।“
मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में अनेक सुझाव दिये।
उन्होंने कहा कि राज्यों को टीकाकरण के लिए अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की श्रेणी तय करने में कुछ ढील मिलनी चाहिए, जिससे वे 45 साल से कम उम्र के लोगों को भी टीकाकरण का पात्र बना सकें। इस समय देश में 45 साल से अधिक उम्र के लोग ही टीका लगवाने के लिए पात्र हैं।
सिंह ने कहा कि कुछ राज्य स्कूल शिक्षकों, बस, तिपहिया और टैक्सी चालकों, नगर निगम तथा पंचायत कर्मियों और अदालतों में जाने वाले वकीलों को अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले योद्धाओं की श्रेणी में सूचीबद्ध करना चाहते हैं और ऐसे में उनकी उम्र 45 साल से कम होने पर भी टीका लगाया जा सकता है।
एक दिन पहले ही कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए जरूरी प्रयासों पर चर्चा हुई थी।
सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार को अगले छह महीने के टीकों की खुराक के ऑर्डर और आपूर्ति के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर हम इस अवधि में एक लक्षित संख्या का टीकाकरण चाहते हैं तो हमें पहले ही पर्याप्त ऑर्डर देने होंगे ताकि उत्पादक आपूर्ति के तय कार्यक्रम के अनुसार काम कर सकें।“
उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि टीकों की यह अपेक्षित आपूर्ति एक पारदर्शी फॉर्मूले के आधार पर राज्यों में कैसे वितरित की जाएगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार आपात जरूरतों के लिए 10 प्रतिशत खुराक रख सकती है और राज्यों को संभावित उपलब्धता का स्पष्ट संकेत होना चाहिए ताकि वे अपनी योजना तैयार कर सकें।
श्री सिंह ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा टीका निर्माता बनकर उभरा है और इस सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति में सरकार को टीका निर्माताओं को धन और अन्य रियायतें देकर उनकी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाकर उनका समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि यह कानून में अनिवार्य लाइसेंसिंग प्रावधान लागू करने का समय है ताकि अनेक कंपनियां लाइसेंस के तहत टीकों का उत्पादन कर सकें। मुझे याद आता है कि एचआईवी/एड्स की बीमारी से निपटने के लिए पहले ऐसा हुआ था।“
इजराइल का उदाहरण देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत भी यह काम बहुत तेजी से कर सकता है।
सिंह ने कहा कि घरेलू आपूर्तियां सीमित किये जाने के मद्देनजर ऐसे किसी टीके को घरेलू परीक्षणों पर जोर दिये बिना आयात करने की अनुमति होनी चाहिए जिन्हें यूरोपीय मेडिकल एजेंसी या यूएसएफडीए जैसे किसी प्रामाणिक प्राधिकार ने इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा, “हम अभूतपूर्व आपात स्थिति से गुजर रहे हैं और मैं समझता हूं कि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ढील आपात स्थिति में उचित है।“
सिंह ने कहा कि एक सीमित अवधि के लिए ढील दी जा सकती है, जिनमें भारत में पूरक परीक्षण पूरे किये जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे सभी टीकों के उपभोक्ताओं को इस तरह की चेतावनी दी जा सकती है कि इन टीकों को संबंधित विदेशी प्राधिकार द्वारा प्रदत्त मंजूरी के आधार पर उपयोग के लिए इजाजत दी जा रही है। 

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