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ये है हमारे छत्तीसगढ़ का पहला नियाग्रा, यहां कि खूबसूरती पर्यटकों का मन मोह रही, जरा आप भी घूम आइये…देखिये वीडियो

छत्तीसगढ़ में अगर कोई खूबसूरत नजारा वाला जगह है तो वह है चित्रकूट जलप्रपात। यहां की वादी काफी आकर्षक है, जो कि देखते ही बनती है। यहां जो कोई भी एक बार पहुंचता है, दोबारा जरूर जाने की चाह रखता है। चलिए आज इसी वादी के बारे में आपको रूबरू कराते है…
जगदलपुर से 39 किमी दूर इन्द्रावती नदी पर यह जलप्रपात बनता है। समीक्षकों ने इस प्रपात को आनन्द और आतंक का मिलाप माना है। 90 फुट ऊपर से इन्द्रावती की ओजस्विन धारा गर्जना करते हुए गिरती है। इसके बहाव में इन्द्रधनुष का मनोरम दृश्य, आल्हादकारी है। यह बस्तर संभाग का सबसे प्रमुख जलप्रपात माना जाता है। जगदलपुर से समीप होने के कारण यह एक प्रमुख पिकनिक स्पाट के रूप में भी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। अपने घोडे की नाल समान मुख के कारण इस जाल प्रपात को भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है।
चित्रकूट जलप्रपात के बाएं तरफ शिव मंदिर
चित्रकूट जलप्रपात के बाएं किनारे पर, एक छोटा हिंदू मंदिर जो भगवान शिव को समर्पित है और कई प्राकृतिक रूप से “पार्वती गुफाओं” (शिव की पत्नी पार्वती) के नाम पर बनाया गया है। गर्मी के मौसम को छोड़कर क्षेत्र में मौसम आम तौर पर सुहावना होता है, जब यह क्षेत्र में वनस्पति की अनुपस्थिति के कारण गर्म होता है। जगदलपुर के मैदानी इलाकों के माध्यम से नालियों में बहने के कारण नदी अपने बहाव की वजह से गिरती हुई नदी के किनारे पर धीमी गति से बहती है। नदी घाटी की इस पहुंच में बहुत कम वन कवर हैं। नदी के नीचे बोधघाट वनाच्छादित क्षेत्र आता है और नदी का प्रवाह अपने प्रवाह की स्थिति में भारी परिवर्तन से गुजरता है। नदी के बहाव क्षेत्र में वातन प्रक्रिया और वन नदी में गाद को छानते हैं।


पर्यटन मंडल ने आकर्षक बनाया रिसोर्ट
जलप्रपात से चंद कदमों पर पर्यटन मंडल ने आकर्षक रिसोर्ट बनाया है। इस रिसोर्ट में वुडन रूम भी बनाये गए है। साथ में ही कैफेटेरिया तैयार किया गया है। वैसे सभी सीजन में यहां लोग पहुँचते है। गार्डन भी बनाये गए है, पूरी हरियाली भी एकतरफा नजर आती है।

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