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आजाद के बाद अब ये दिग्गज नेता भी छोड़ सकता है कांग्रेस का साथ, किए चौंकाने वाले खुलासे

नई दिल्ली। कांग्रेस से नाता तोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की लिस्ट लंबी होती जा रही है. गोवा में दो दिन पहले कांग्रेस के 8 नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. इससे पहले गुलाम नबी आजाद ने अपने फैसले से सभी को चौंकाया था. उन्होंने सोनिया गांधी को लंबा खत लिखकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. कांग्रेस से आजाद के इस्तीफे की चर्चा आज सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है. इस बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता कर्ण सिंह ने भी पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा है कि लगता है अब उन्हें (कांग्रेस) मेरी जरूरत नहीं.

नहीं मिला भारत जोड़ो यात्रा का न्योता

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर पूरी पार्टी सड़कों पर उतरी है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ कर्ण सिंह इसमें शामिल नहीं है. उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से यात्रा में शामिल होने के लिए कोई न्योता नहीं आया है. पिछले कुछ वर्षों से पार्टी से अलग हैं और पार्टी की किसी कमेटी में भी नहीं हैं. डॉ कर्ण सिंह ने कहा कि मुझे भारत जोड़ो यात्रा के लिए कोई न्योता नहीं आया है, कई वर्षों से मैं अलग ही हूं, ना किसी कमेटी में हूं और ना ही कोई हमारी राय लेता है.

कांग्रेस के साथ संबंध अब दूरी का..

मैं अपना कार्य करता रहता हूं. कांग्रेस के साथ संबंध अब दूरी का हो गया है, हालांकि सारी उम्र में पार्टी में रहा हूं. लेकिन अब उन्हें मेरी आवश्यकता नहीं लगती है. मैंने दुनिया में बहुत कुछ देखा है, इसलिए कोई दुख नहीं होता है. कांग्रेस के माध्यम से मुझे बहुत कुछ मिला है. लेकिन एक समय आता है जब लोग समझते हैं कि आवश्यकता नहीं है. दरअसल 3500 किलोमीटर की यात्रा राहुल गांधी ने श्रीपेरंबदूर से शुरू की थी, वह यहां पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के स्मारक पर एक प्रार्थना सभा में शामिल हुए थे. इसी जगह पर राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी.

कांग्रेस एक और यात्रा की कर रही तैयारी

150 दिन चलने वाली इस यात्रा के बाद पार्टी एक और यात्रा की तैयारी कर रही है. पार्टी ने गुरुवार (15 सितंबर) को संकेत दिया कि वह इस यात्रा के पूरा होने के बाद अगले साल पश्चिम में गुजरात से पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक एक और यात्रा शुरू कर सकती है. राहुल गांधी नें इस यात्रा की शुरुआत पिता के स्मारक से की थी, जहां तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने उन्हें राष्ट्र ध्वज सौंपा था.

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