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पटना पुलिस का बड़ा खुलासा, 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की हो रही थी तैयारी

पटना. पुलिस ने बड़ी साजिश का खुलासा किया है. राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में देश के कई राज्यों के युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही थी. इस ट्रेनिंग का मकसद 2047 में भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना था.इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने सोमवार की रात यह कार्रवाई की थी, लेकिन मीडिया को जानकारी बुधवार की शाम को दी गई. ध्यान रहे कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पटना पहुंचे थे.

खुफिया एजेंसियों को कुछ दिन पहले जानकारी मिली थी कि पटना में पीएफआई (Popular Front of India ) द्वारा युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसी खुफिया जानकारी के आधार पर पटना पुलिस ने फुलवारीशरीफ के नया टोला इलाके में पीएफआई के दफ्तर में छापेमारी की. पुलिस ने मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया. इसमें एक मोहम्मद जलालुद्दीन झारखंड का रहने वााल है. वह रिटायर्ड दारोगा है. इसके साथ अतहर परवेज को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस को बड़े पैमाने पर आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं. इसमें पीएफआई के मिशन-2047 के गोपनीय दस्तावेज भी हैं.

फुलवारीशरीफ के एएसपी मनीष कुमार ने बुधवार को बताया कि नया टोला के अहमद पैलेस में कुछ लोगों के देश विरोधी साजिश में शामिल होने की खुफिया जानकारी मिली थी. हमें पता चला कि वहां दो महीने से संदिग्ध गतिविधियां जारी हैं. इसी आधार पर हमने 11 जुलाई की रात छापेमारी की. छापेमारी में हमें कई दस्तावेज मिले. इसी में मिशन-2047 के भी दस्तावेज मिले. इसमें 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की जानकारी मिली. इसमें था कि देश में धार्मिक उन्माद फैलाना है. इस दस्तावेज में देश के विरोध में मुसलमानों को एक करने की बात कही गई थी.

एएसपी ने बताया कि इन बैठकों में अतहर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन जरूर रहते थे. 6-7 और जुलाई को देशभर से बड़ी संख्या में नौजवानों को ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया था. इनमें ज्यादातर नौजवान पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, झारखंड, उत्तर प्रदेश के थे. इन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी. साथ ही मार्शल आर्ट भी ट्रेनिंग दी गई. पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अतहर प्रतिबंधित संगठन सिमी का सदस्य भी रह चुका है.

मनीष कुमार ने बताया कि अतहर परवेज एसडीएफआई (Social Democratic Party of India) नाम का संगठन बनाकर इस ट्रेनिंग को चला रहा था. शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि इन्हें विदेशों से फंडिंग भी होती थी.

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