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High Court ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगाई

भोपाल. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में 54 फीट ऊंचे चबूतरे पर बनने वाली आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है.

मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भी राज्य सरकार को नोटिस जारी कर प्रकृति की क्षति और स्थानीय जनता की आस्था की उपेक्षा को देखते हुए जवाब मांगा है.

अदालत का यह फैसला भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ (आदि शंकराचार्य) के निर्माण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आया.

याचिकाकर्ता – लोकहित अभियान समिति (इंदौर स्थित एक एनजीओ) ने पेड़ों को काटने और पहाड़ की खुदाई का विरोध किया था.

सुनवाई के दौरान एनजीओ की ओर से पेश हुए काउंसलर ने दलील दी कि ‘स्टेच्यू ऑफ वननेस’ के निर्माण के लिए पेड़ों की संख्या को काटने और पहाड़ की खुदाई से क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान होगा.

सुनवाई पर कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस परियोजना से प्रकृति को हुए नुकसान और स्थानीय जनता की आस्था की उपेक्षा को देखते हुए जवाब मांगा है. कोर्ट ने खंडवा कलेक्टर, डीएफओ व राजस्व अधिकारी व राज्य पुरातत्व विभाग से भी जवाब तलब किया है.

विशेष रूप से, शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट ने ओंकारेश्वर में 2,141 करोड़ रुपये की लागत से 8 वीं शताब्दी के भारतीय दार्शनिक आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ-साथ उन्हें समर्पित एक संग्रहालय और एक अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.

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