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जानें कौन हैं द्रौपदी मुर्मू, एनडीए ने जिन्हें बनाया है राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

दिल्ली. NDA ने तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में द्रौपदी मुर्मू के नाम का बड़ा ऐलान कर दिया है. बता दें कि वो पहले झारखंड की राज्यपाल रह चुकी हैं. बता दें कि उनका जन्म ओडिशा में हुआ था. ऐसे में माना जा रहा है कि अब बीजू जनता दल NDA को समर्थन दे सकता है. इसके पीछे वजह है कि मुर्मू उसी राज्य से आती हैं जहां नवीन पटनायक के नेतृत्व में BJD की सरकार चल रही है.

भाजपा प्रमुख ने किया ऐलान

भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम का ऐलान करते हुए कहा कि पहली बार किसी महिला आदिवासी प्रत्याशी को वरीयता दी गई है. हम आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए द्रौपदी मुर्मू को एनडीए के उम्मीदवार के रूप में घोषित करते हैं.

ओडिशा से है तालुक्क

उल्लेखनीय है कि ओडिशा के आदिवासी जिले मयूरभंज के रायरंगपुर गांव में जन्मी द्रौपदी मुर्मू झारखंड की प्रथम महिला राज्यपाल रह चुकी हैं. बता दें कि द्रौपदी 18 मई 2015 से 12 जुलाई 2021 तक झारखंड की राज्यपाल रहीं थीं. वह झारखंड की नौवीं राज्यपाल रहीं. द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल हैं.

द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुआ था और दोनों के तीन बच्चे (दो बेटे और एक बेटी) हुए. लेकिन, द्रौपदी मुर्मू का व्यक्तिगत जीवन त्रासदियों से भरा रहा है और उन्होंने अपने पति व दोनो बेटों को खो दिया. उनकी बेटी इतिश्री की शादी गणेश हेम्ब्रम से हुआ है.

कभी करती थीं सिंचाई विभाग में जूनियर असिस्टेंट की नौकरी

हालांकि, द्रौपदी मुर्मू ने कभी भी कठिनाइयों से हार नहीं मानी और सभी बाधाओं को पार करते हुएउन्होंने भुवनेश्वर के रामादेवी महिला कॉलेज से आर्ट्स में ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्हें ओडिशा सरकार के सिंचाई और बिजली विभाग में एक जूनियर असिस्टेंट यानी कलर्क के रूप में नौकरी मिली. बाद में, उन्होंने रायरंगपुर में श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में मानद सहायक शिक्षक के रूप में भी काम किया.

पार्षद के रूप में शुरू किया अपना राजनीतिक करियर

संथाल समुदाय में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू ने साल 1997 में ओडिशा के रायरंगपुर नगर पंचायत में एक पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया और फिर साल 2000 में वह ओडिशा सरकार में मंत्री बनीं.

BJD-BJP गठबंधन टूटने के बाद भी दर्ज की जीत

रायरंगपुर से दो बार विधायक रहीं द्रौपदी मुर्मू ने साल 2009 में तब भी अपनी विधानसभा सीट पर जीत हासिल की, जब बीजु जनता दल ने ओडिशा के चुनावों से कुछ हफ्ते पहले भाजपा से नाता तोड़ लिया था. उस चुनाव में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजद ने जीत दर्ज की थी.

सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए मिला था नीलकंठ पुरस्कार

द्रौपदी मुर्मू को साल 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा साल के सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनके पास ओडिशा सरकार में परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे मंत्रालयों को संभालने का अनुभव है.

बीजेपी संगठन में संभाल चुकी हैं कई अहम पद

द्रौपदी मुर्मू भारतीय जनता पार्टी की ओडिशा इकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष भी रहीं. उन्हें 2013 में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था.

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का गौरव

द्रौपदी मुर्मू के नाम झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का भी गौरव हासिल है. द्रौपदी मुर्मू 18 मई 2015 को झारखंड की 9वीं राज्यपाल बनाई गई थीं और 12 जुलाई 2021 तक इस पद पर रहीं. अगर, वह राष्ट्रपति के लिए चुनी जाती हैं तो आजादी के बाद पैदा होने वाली पहले राष्ट्रपति भी होंगी.

आपको बता दें कि पहला मौका है जब देश को आदिवासी राष्ट्रपति मिलने जा रही हैं. इससे पहले अब तक देश में कोई आदिवासी राष्ट्रपति नहीं रहा. इस लिहाज से मुर्मू आदिवासी और महिला, दोनों वर्ग में फिट बैठती हैं. 

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