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कुमार विश्वास, तजिंदर पाल बग्गा को कोर्ट से राहत

नई दिल्ली. पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास और भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ पंजाब पुलिस द्वारा अलग-अलग मामलों में दर्ज प्राथमिकियों को बुधवार को खारिज कर दिया.

उच्च न्यायालय ने दोनों को क्लीन चिट देते हुए कहा कि कोई भी लोकतंत्र अपनी पसंद की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना नहीं सफल नहीं हो सकता.

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानों को लेकर पंजाब की रूपनगर पुलिस ने विश्वास के खिलाफ मामला दर्ज किया था. वहीं, अप्रैल में मोहाली में भड़काऊ बयान और आपराधिक धमकी देने के आरोपों में बग्गा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. वरिष्ठ अधिवक्ता चेतल मित्तल ने बताया कि न्यायमूर्ति अनूप चितकारा ने प्राथमिकियों को खारिज करने का आदेश दिया है. अदालत का फैसला आने के बाद कुमार विश्वास ने न्यायपालिका और प्रशंसकों का धन्यवाद किया.

उच्च न्यायालय ने फैसले में क्या कहा

कुमार विश्वास पर लोकतंत्र में चुनाव-पूर्व का समय लोगों की जानकारी की दृष्टि से सबसे अधिक मायने रखता है. याचिकाकर्ता एक सामाजिक शिक्षाविद हैं और उनके पूर्व सहयोगी के साथ हुई कथित बातचीत को साझा करने को लेकर यह नहीं कहा कहा जा सकता है कि उन्होंने (याचिकाकर्ता ने) जहर उगला था. वर्गों को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने के किसी भी इरादे का अनुमान लगाने का कोई मतलब नहीं है.

तजंदिर बग्गा पर न्यायाधीश ने कहा कि आईपीसी की धारा 153ए तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देता है और सौहार्द खत्म करने के लिए प्रतिकूल कार्य करता है.

एक अलग याचिका में, आप के पूर्व नेता कुमार विश्वास ने 26 अप्रैल को उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ बयान देने के लिए पंजाब पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी. 12 अप्रैल को, रूपनगर पुलिस ने नरिंदर सिंह की शिकायत पर विश्वास को IPC की धाराओं के तहत समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, आपराधिक साजिश, धर्म या नस्ल के आधार पर दुश्मनी पैदा करने के इरादे से समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने आदि के तहत मामला दर्ज किया. इससे पहले, हाईकोर्ट ने विश्वास की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. इसे कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक उपयुक्त मामला बताया था.

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