छत्तीसगढ़

सोमवती अमावस्या का पर्व मनाया गया दूधाधारी मठ में

सोमवती अमावस्या के साथ वट सावित्री एवं शनि जयंती एक साथ

छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर में स्थित श्री दूधाधारी मठ में सोमवती अमावस्या का पर्व श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्री बालाजी, रामपंचायतन एवं श्री संकट मोचन हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना की गई। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस कहलाती है। 30 मई सन 2022 को संयोग से सोमवार होने के कारण यह अमावस्या सोमवती अमावस्या के रूप में मनाया गया ।कहा जाता है कि इस दिन अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। श्री दूधाधारी मठ एवं श्री शिवरीनारायण मठ पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने इस संदर्भ में अपने संदेश में कहा कि- महाभारत की कथा के अनुसार जब पितामह भीष्म सरसैया पर थे तब वे सोमवती अमावस्या को अपना प्राणोत्सर्ग करना चाह रहे थे। बहुत प्रतीक्षा के बाद भी जब सोमवती अमावस्या नहीं आयी तब उन्होंने इसे श्राप दे दिया और कहा कि बहुत प्रतीक्षा के पश्चात भी तुम नहीं आई कलयुग में तुम्हारा आगमन बार-बार होगा लेकिन लोग तुम्हें पूछेंगे नहीं। इसलिए अब यह बार-बार आती है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या के साथ ही साथ वट सावित्री और शनि जयंती का भी अद्भुत संयोग है। इसलिए इस दिन उपवास, व्रत,तप भजन, पूजन का अत्यधिक महत्व है। सौभाग्य वती माताओं के लिए यह विशेष फलदाई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अमावस्या का अपना अलग महत्व है किंतु सोमवती अमावस्या को यदि श्रद्धालु श्रद्धा भक्ति पूर्वक पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान, दान कर भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं या अपने इष्ट देव की पूजा करते हैं तो उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष में बारह अमावस्या होती हैं। कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, इस दिन चंद्रमा की कलाएं ना तो घटती है और ना ही बढ़ती है अर्थात स्थिर हो जाती हैं। पूजा अर्चना से विशेषकर पितृ देवता भी प्रसन्न होते हैं। श्री दूधाधारी मठ में संत- महात्मा, विद्यार्थी एवं पुजारी गण सुबह से ही हरिनाम संकीर्तन में लगे हुए हैं! दर्शनार्थी श्रद्धालुओं की संख्या भी अन्य दिनों की अपेक्षा काफी अधिक है! श्रद्धालु भक्तों का दिन भर आना जाना लगा हुआ है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button