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महिला बाल विकास विभाग में पदोन्नति में मनमानी, नियमों का भी खुला उल्लंघन, जानें पूरी खबर

महिला बाल विकास विभाग में पदोन्नति में बड़ी गड़बड़ी देखने को मिल रही है। एक अधिकारी को पदोन्नत करने नियमो का उल्लंघन किया गया है। संचालनालय पदस्त अफसरों ने पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीय तरीके से की है ताकि बिना किसी आपत्ति के प्रमोशन आदेश हो जाए। दस्तावेजों के अनुसार उपसंचालक के कुल स्वीकृत 35 पदों में छह पद रिक्त है जिसमे पदोन्नति होना है। ऐसे में स्थापना में पदस्थ अफसर ने ग्रेडेशन लिस्ट में बड़ा खेल किया है। पूरा खेल स्थापना और आईसीडीएस में पदस्थ अफसरों ने किया है। दरअसल पदोन्नति के लिए विभागीय अफसरों ने साल 2021 के ग्रेडेशन लिस्ट को अंतिम मन जबकि पदोन्नति 1 अप्रैल 2022 के लिस्ट के अनुसार होनी थी। वही 1 अप्रैल 2021 की लिस्ट में साल 2020 में सहायक संचालक से उपसंचालक बने तीन अफसरों अभय देवांगन, अजय शर्मा और चंद्रवेश सिसोदिया का नाम शामिल ही नहीं किया, वही सेवानिवृत एक अधिकारी नाम शामिल है। ऐसे में स्वीकृत 35 पदों के अनुपात में रिक्त छह पदों पर प्रमोशन होना था। इसके दस्तावेज आम आदमी पत्रिका के हाथ लगे है।

जानें क्या है मामला

स्थापना शाखा में पदस्थ अफसरों ने निचले क्रम में पदस्थ अफसरों को पदोन्नत करने शुरुआत के छह सहायक संचालको को अयोग्य घोषित कर दिया जिसमे रेणुप्रकाश, रमेश साहू, शैल ठाकुर, हेमंत साहू, हेमराम राणा और परेश त्रिवेदी शामिल है। अधिकारियो ने डीपीसी के दौरान तर्क दिया कि इन अफसरों की विभागीय जाँच लंबित है ऐसे में इन्हे पदोन्नत नहीं किया जा सकता। तर्क सही था पर संबंधितो का लिफाफा बंद कर उनके लिए पद सुरक्षित रखना था पर ऐसा नहीं किया गया और निचले क्रम के सहायक संचालक एमडी नायक, सोमेंद्र पॉल,अवनि बिस्वाल और सुनील शर्मा के नाम को आगे बढ़ा दिया गया। अफसर यहाँ भी चूक कर गए। निचले क्रम के चार लोगो को प्रमोट करने के बाद भी दो पद रिक्त है जिस पर डीपीसी नहीं की गई। अब आनन फानन में प्रमोशन आदेश जारी करने हाथो हाथ फाइल मंत्री बंगले भेजी गई है ताकि बिना देरी के आदेश जारी हो सके।

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