
Atal Setu: 21.8 किलोमीटर लंबे और छह लेन वाले इस पुल का निर्माण ₹18,000 करोड़ की भारी लागत से किया गया है. इस पुल से जुड़ी ऐसी ही खास बातें यहां जानिए.
यह पुल मुंबई के सेवरी से शुरू और रायगढ़ जिले के उरण तालुका में न्हावा शेवा पर समाप्त हो रहा है. इससे नवी मुंबई और आसपास के अन्य क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
इससे मुंबई और नवी मुंबई के बीच की दूरी घटकर केवल 20 मिनट रह गई है, जिसमें पहले 2 घंटे लगते थे.
मुंबई पुलिस ने पुल पर 4 व्हीलर्स के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा तय की है. इस पर मोटरबाइक, ऑटोरिक्शा और ट्रैक्टर चलाने की अनुमति नहीं होगी.
इसके निर्माण में 500 बोइंग हवाई जहाजों के वजन के बराबर और एफिल टॉवर के वजन से 17 गुना अधिक स्टील का उपयोग किया गया है.
177,903 मीट्रिक टन स्टील और 504,253 मीट्रिक टन सीमेंट का उपयोग किया गया था.
यह पुल मुंबई और पुणे एक्सप्रेसवे के बीच की दूरी भी कम करेगा. निर्माणाधीन नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे क्षेत्रों से भी कनेक्शन प्रदान करेगा. प्रतिदिन 70,000 वाहनों के पुल से गुजरने की उम्मीद है.
पुल का निर्माण 2016 में शुरू हुआ था. यह दुनिया का 12वां सबसे लंबा समुद्री पुल है.अटल सेतु देश का सबसे लंबा पुल होने के साथ-साथ सबसे लंबा समुद्री पुल भी है.
पुल की आधारशिला दिसंबर 2016 में प्रधान मंत्री ने रखी थी. यह 21.8 किलोमीटर लंबा छह लेन वाला पुल है, जिसकी लंबाई समुद्र के ऊपर 16.5 किलोमीटर और जमीन पर लगभग 5.5 किलोमीटर है.
यह मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा.
मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत के सफर का समय भी कम होगा. इससे मुंबई बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा.






