
चुनाव आयोग ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को भावभीनी विदाई दी। वह आज अपने पद से रिटायर हो गए। उन्होंने 1 सितंबर 2020 को चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था और 15 मई 2022 को भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने।
राजीव कुमार का ऐतिहासिक कार्यकाल
राजीव कुमार का 4.5 वर्षों का कार्यकाल चुनावी सुधारों, तकनीकी नवाचार, क्षमता विकास और पारदर्शिता के लिए जाना जाएगा। उनके नेतृत्व में 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव, 2022 के राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और राज्यसभा के नवीनीकरण सहित महत्वपूर्ण चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए। खास बात यह रही कि उनके कार्यकाल में सभी चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए, बिना किसी हिंसा या पुनर्मतदान की आवश्यकता के।
प्रमुख उपलब्धियां और सुधार
17 वर्ष पार कर चुके युवाओं का मतदाता पंजीकरण संभव हुआ।
असम में परिसीमन कर चुनावी सीमाओं को पुनर्परिभाषित किया गया।
प्रौद्योगिकी-संचालित सुधारों से चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ बनी।
मिथक बनाम वास्तविकता रजिस्टर लॉन्च कर 2024 के लोकसभा चुनाव में गलत सूचनाओं का मुकाबला किया।
पीवीटीजी और थर्ड जेंडर जैसे हाशिए पर मौजूद समुदायों को चुनाव प्रक्रिया में शामिल किया।
2.5 लाख सौ वर्षीय मतदाताओं को व्यक्तिगत पत्र भेजकर उनका सम्मान किया।
शहरी उदासीनता दूर करने के लिए ऊंची इमारतों में मतदान केंद्र स्थापित किए।
लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में योगदान
राजीव कुमार ने अपने विदाई भाषण में डेढ़ करोड़ मतदान कर्मचारियों को धन्यवाद दिया और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और साइबर हमलों के खतरों से बचने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किए। उनके प्रयासों से भारत का चुनाव प्रबंधन वैश्विक स्तर पर सराहा गया।
आगे
राजीव कुमार का कार्यकाल समावेशी, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत चुनावी प्रणाली के लिए याद रखा जाएगा। उनकी विरासत चुनाव आयोग को आने वाले वर्षों में भी प्रेरित करती रहेगी।






