जो खेलेगा, वही हारेगा, वही जीतेगा: बृजमोहन अग्रवाल.

रायपुर. नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम, रायपुर स्थित कराटे स्कूल के स्थापना दिवस पर वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल जी शामिल हुए. ओपी शर्मा व अजय साहू व स्कूल के स्टॉफ के साथ साथ बच्चों के अभिवावक मौजूद रहे. इस उत्सव पर बच्चों ने अपने नाटकीय रूपांतरण के प्रदर्शन से नारी सुरक्षा एवं सशक्तिकरण का संदेश दिया. श्री अग्रवाल नें बच्चों एवं उनके अभिभावकों से खेल व खेल के जीवन में महत्व के संबंध में संवाद किया.

 इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कराटे दिवस के अवसर पर सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि जो खेलता है, वही हारता है और फिर वही खिलाड़ी जीतता भी है. इसलिए हमको खेलने से भागना नहीं चाहिए. मैडल नहीं मिला तो परेशान नहीं होना चाहिए और मिल गया तो बहुत ज्यादा खुश भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये जीवन का हिस्सा है. जब हारना और जीतना हम सीखते हैं तो फिर हमको परिवार में भी ना सुनने कि आदत हो जाती है, वो बच्चा कभी परेशान नहीं होता. इस दौरान बृजमोहन अग्रवाल जी ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि –

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले

श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि आजकल बच्चे खेल के मैदान में कम उतर रहे हैं, वो मोबाइल या लैपटॉप में ज्यादा लगे रहते हैं. बच्चों को जीवन में सफल बनाने के लिए उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ एक्स्ट्राकरीकुलर गतिविधियों जैसे खेल, संगीत, आदि गतिविधियों में भी उनको शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. आज समय परिवर्तित हो चुका है. आज जो खेलता कूदता है वही नवाब बनता है. खिलाड़ियों को देख लीजिए सचिन तेंदुलकर, कपिल देव. आज हमारे लिए पढ़ाई भी जरूरी है, लेकिन बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए, उनके मस्तिष्क के विकास के लिए एक्स्ट्राकरिकुलर गतिविधियां भी जरूरी हैं. बच्चे को अगर एक रुपए का पेन भी पुरस्कार में मिलता है तो वो बहुत बड़ी बात है. और विशेष और तौर पर कराटे तो बच्चों एवं विशेषता लड़कियों के लिए तो बहुत ज्यादा जरूरी हैं. कराटे और खेल हमारे भीतर आत्मविश्वास की वृद्धि करते हैं. बच्चों में आत्मविश्वास होना सबसे ज्यादा जरूरी है. कराटे सीख कर हम अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अपने परिवार और अपने आस-पास के लोगों की भी सुरक्षा कर सकते हैं. कहीं पर गलत होते देखें तो बचाव में मदद कर सकते हैं. एक खिलाड़ी प्रत्येक क्षेत्र का एम्बेस्डर होता है. अभी छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय खेलों में मेडल लाकर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है.  हमारे जिस काम को करने से हम दूसरों को गर्व करा सकें ऐसा काम हमको करना चाहिए. जिंदगी में अनुशासन सबसे बड़ी चीज़ है और खेल का मैदान हमें वही सिखाता है.

Related Articles

Back to top button