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सुप्रीम कोर्ट ने कहा अमेरिका का हवाला न दें, हम उससे बहुत आगे निकल चुके

समलिंगियों के विवाह को मान्यता देने की याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली पीठ ने बुधवार को केंद्र सरकार के एक अमेरिकी फैसले का हवाला देने पर गंभीर आपत्ति जताई. अदालत ने कहा ‘अमेरिकी फैसले का हवाला न दें, सौभाग्य से भारत में हम उससे आगे निकल चुके हैं.’

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने सालिसिटर जरनल तुषार मेहता से कहा कि वह डाब्स बनाम एक्स (2022) फैसले का जिक्र न करें. इस फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 50 वर्ष पुराने अपने निर्णय (रो बनाम वैड, 1973) को निरस्त कर दिया था.

न्यायपालिका के पास कानून बनाने की क्षमता नहीं कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायपालिका के पास कानून बनाने की क्षमता नहीं है, गर्भपात को विनियमित करने का प्राधिकार जनता को और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के पास है. मेहता के डाब्स फैसले का नाम लेने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि आप डाब्स पर भरोसा कर रहे हैं तो हम बात दें कि सौभाग्य से हम भारत में इससे बहुत आगे निकल चुके हैं. क्योंकि डाब्स में यूएस सुप्रीम कोर्ट ने एक विचार को रखा है कि महिला को अपने शरीर पर कोई अधिकार नहीं है, इस थ्योरी को हम भारत में कब का नकार चुके हैं. ऐसे में यदि आप इसकी नजीर दे रहे हैं तो ऐसा नहीं करें.

संसद में बहस होने दें मेहता ने कहा कि वह डाब्स के तथ्यों पर नहीं जा रहे हैं, न ही वह गर्भपात के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इसमें कानून बनाने को लेकर जो बहस हुई वह उसे बता रहे हैं जिसमें कहा गया है कि जब सामाजिक प्रभावों का मामला हो तो हमें जनता के प्रतिनिधियों के पास लौटना चाहिए. वह सिर्फ इस सीमित सिद्धांत का हवाला दे रहे हैं कि पहले संसद में इस पर बहस होने दें. कृपया गर्भपात के हिस्से को भूल जाएं, मैं भी उसे स्वीकार नहीं करता. उसका निस्तारण हो चुका है.

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