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एथनॉल ईंधन वाले दोपहिया और तिपहिया जल्द आएंगे गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि देश में शीघ्र ही एथनॉल ईंधन से चलने वाले दोपहिया और तिपहिया वाहन भी लॉन्च होने वाले हैं. उन्होंने तेल विपणन कंपनियों से एथनॉल पंप शुरू करने की भी अपील की.

एथनॉल-बिजली से चलने वाले दुनिया के पहले फ्लेक्स ईंधन आधारित वाहन को पेश करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में इस ईंधन के पंप नहीं हैं, इसलिए मेरा पेट्रोलियम मंत्री से अनुरोध है कि वो सभी तेल कंपनियों को एथनॉल के पंप शुरू करने का आदेश दें. उन्होंने कहा कि फ्लेक्स ईंधन तकनीक देश में प्रदूषण को कम करने और कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगी.

किसान ऊर्जादाता बनेंगे गडकरी ने यह भी कहा कि एथनॉल उद्योग किसानों के लिए वरदान है. देश में एथनॉल की मांग बढ़ेगी, यह भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को बदल देगा. उन्होंने कहा कि हमारे किसान न केवल अन्नदाता होंगे बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बनेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि एथनॉल की मांग के साथ जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी. उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश ने भारत से एथनॉल मिले पेट्रोल की आपूर्ति करने का अनुरोध किया है.

पूरे देश में उपलब्ध होगा कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मौजूदा समय में ई-20 ईंधन देशभर में 3,300 से अधिक पेट्रोल पंप पर वितरित किया जा रहा है और अप्रैल, 2025 तक यह पूरे भारत में उपलब्ध होगा. अप्रैल, 2025 तक ई-20 कार्यान्वयन के साथ अनुमानित आयात खर्च की बचत लगभग 35,000 करोड़ रुपये सालाना हो सकती है.

सभी को फायदा

वाहन चालक देश में एथनॉल की कीमत फिलहाल 60 रुपये लीटर के आसपास है. यह पेट्रोल की तुलना में कहीं अधिक किफायती है. एथनॉल ईंधन पर चलने वाले वाहन 15 से 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे सकते हैं.

 

मारुति भी फ्लेक्स ईंधन वाले वाहन पर काम कर रही

टोयोटा के अलावा मारुति भी फ्लेक्स ईंधन वाहनों पर काम कर रही है. कंपनी ने इस साल जनवरी में ऑटो एक्सपो में वैगन आर प्रोटोटाइप को पेश किया था. ये कार 85 एथेनॉल मिश्रत ईंधन पर चल सकती है.

क्या होगा फायदा

सड़क परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिकारा का कहना है कि बीएस-6 स्टेज-2 उत्सर्जन मानक से वाहनों की इंजन की क्षमता बढ़ेगी, वायु प्रदूषण में 50 फीसदी की कमी आएगी.

ऐसे बनता है एथनॉल

एथनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है.

पर्यावरण पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी. इसके इस्तेमाल से गाड़ियां 35 फीसदी तक कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन करती हैं.

क्या होते हैं फ्लेक्स ईंधन वाहन

ये हाईब्रिड वाहन होते हैं. इनमें लगने वाले इंजन ऐसे होते हैं, जो एक से ज्यादा ईंधन विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं. ये पेट्रोल, एथनॉल या पेट्रोल-एथनॉल के मिश्रण पर चल सकते हैं. साथ ही सीएनजी, बायो-एलएनजी और इलेक्ट्रिक को भी ईंधन की तरह इस्तेमाल करने में सक्षम होते हैं. टोयोटा ने इलेक्ट्रिक-एथनॉल पर चलने वाला वाहन विकसित किया है.

किसान एथनॉल गन्ने, मक्का और कई दूसरी फसलों से बनाया जाता है. इसका इस्तेमाल बढ़ने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी. चीनी मिलों को भी फायदा मिलेगा.

सरकार पिछले दिनों नितिन गडकरी ने कहा था कि एथनॉल ईंधन पेट्रोल के आयात पर होने वाले खर्च को बचा सकता है. फिलहाल आयात पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

 

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