
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह चुनाव आयोग का सूक्ष्म प्रबंधन नहीं कर सकता है. बता दें कि याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक भाषण दिए हैं ऐसे में उनपर कार्रवाई होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि चुनावी आचार संहिता से निपटने का काम चुनाव आयोग का है और कोर्ट को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है.
जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा, हम चुनाव आयोग को माइक्रोमैनेज नहीं कर सकते . चुनाव प्रचार में जो भी बयान दिए जाते हैं या फिर उनपर क्या कार्रवाई करनी है इससे संबंधित फैसले चुनाव आयोग को करने हैं. हम नहीं कह सकते कि उन्हें क्या करना है. इसके बाद उन्होंने इस याचिका को खारिज कर दिया.
याचिका में कहा गया था कि बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री मोदी की स्पीच मामले में एफआईआर दर्ज की जाए. बता दें कि उन्होंने 2 अप्रैल को राजस्थान के बांसवाड़ा में एक रैली को संबोधित किया था. इस भाषण में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस आप लोगों की संपत्ति लेकर उन लोगों में बांट देना चाहती है जिनके ज्यादा बच्चे हैं. उन्होंने ज्यादा बच्चे वालों को घुसपैठिया कहकर संबोधित किया था.
वहीं याचिका में मध्य प्रदेश के सागर में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का भी जिक्र किया गया था. प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर आरक्षण दिया था. याचिका में कहा गया था कि चुनाव आयोग प्रभावी कार्रवाई करने में असफल रहा है ऐसे में कोर्ट को कोई कदम उठाना होगा. इस मामले को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के पास शिकायत भी की थी. कांग्रेस ने कहा था कि भाजपा के प्रत्याशी प्रचार के दौरान धार्मिक चिह्नों का भी प्रयोग कर रहे हैं.






