IND vs WI: रिकॉर्ड रन चेज के बावजूद गौतम गंभीर नाखुश, बोले- ‘यह क्रिकेट नहीं, सिर्फ बल्लेबाजी है’

गुवाहाटी: भारत ने बुधवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में 8 विकेट से शानदार जीत दर्ज कर तीन मैचों की सीरीज अपने नाम कर ली। मुकाबले में रनों की ऐसी बारिश हुई कि दोनों टीमों ने मिलकर 811 रन बनाए, जो वनडे क्रिकेट के इतिहास में किसी एक मैच का तीसरा सबसे बड़ा कुल स्कोर है। हालांकि, इस रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी से भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर खुश नहीं दिखे। उन्होंने मैच में गेंद और बल्ले के बीच संतुलन नहीं होने पर सवाल उठाए।
811 रन के मुकाबले में गेंदबाजों की हुई मुश्किल
गुवाहाटी में खेले गए मुकाबले में कुल 811 रन बने, जबकि दोनों टीमों के गेंदबाजों ने मिलकर 807 रन लुटाए। मैच में पांच शतक देखने को मिले और शुभमन गिल ने ऐतिहासिक दोहरा शतक भी लगाया। भारत ने 406 रन के लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करते हुए 8 विकेट से मुकाबला अपने नाम किया।
भारतीय तेज गेंदबाजों में से किसी की भी इकॉनमी 9 रन प्रति ओवर से कम नहीं रही। भारतीय पेस अटैक ने मिलकर सिर्फ तीन विकेट हासिल किए। दूसरी तरफ वेस्टइंडीज के चारों तेज गेंदबाजों की इकॉनमी 8 रन प्रति ओवर से ज्यादा रही। इनमें से दो गेंदबाजों ने 10 रन प्रति ओवर से भी ज्यादा की दर से रन दिए और वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों को कुल दो विकेट ही मिले।
गौतम गंभीर ने पिच पर उठाए सवाल
गेंद और बल्ले के बीच इस असंतुलन को लेकर गौतम गंभीर ने मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं पूरी तरह ईमानदार रहूं तो मुझे लगता है कि बल्ले और गेंद के बीच थोड़ा और मुकाबला होना चाहिए। आप क्रिकेट की बात करते हैं, लेकिन यह क्रिकेट नहीं है, यह सिर्फ बल्लेबाजी है।’
गंभीर ने आगे कहा, ‘कल्पना कीजिए कि कोई युवा गेंदबाज इस विकेट पर गेंदबाजी कर रहा है और विपक्षी टीम 400 रन बना देती है और फिर हम भी 400 रन का पीछा कर लेते हैं। रिकॉर्ड के लिहाज से यह शानदार है, दर्शकों के लिए शानदार है और ब्रॉडकास्टर के लिए भी शानदार है, लेकिन अगर आप मुझसे एक सच्चे क्रिकेट प्रशंसक और कोच के तौर पर पूछेंगे तो मुझे गेंदबाजों के प्रति भी सहानुभूति रखनी होगी।’
“ऐसी पिच पर गेंदबाजों के साथ न्याय नहीं होता”
गंभीर ने बेहद सपाट पिच पर गेंदबाजी करने की मुश्किलों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘जब आप इस तरह की पिच पर गेंदबाजी करते हैं तो यह गेंदबाजों के साथ न्याय नहीं है। हमें गेंदबाजों को कुछ ऐसा देना होगा जिस पर वे काम कर सकें और उनके पास मुकाबले में कुछ मौके हों।’
भारतीय हेड कोच का मानना है कि पिच में गेंदबाजों के लिए कुछ मदद होनी चाहिए, ताकि मुकाबला सिर्फ बल्लेबाजों के प्रदर्शन तक सीमित न रहे।
डेब्यूटेंट औकिब नबी के बचाव में उतरे गंभीर
इस मैच में भारत के लिए डेब्यू करने वाले औकिब नबी भी बल्लेबाजों के दबदबे वाली पिच पर काफी महंगे साबित हुए। उन्होंने 8.5 ओवर में 84 रन खर्च किए और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला।
हालांकि, गंभीर ने सिर्फ आंकड़ों के आधार पर औकिब के प्रदर्शन का आकलन करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, ‘सबसे पहली बात यह है कि आपको गेंदबाजों के प्रति थोड़ी सहानुभूति और उन्हें कुछ मार्जिन देना होगा। कई बार आप गेंदबाजों पर सख्ती नहीं कर सकते, क्योंकि कभी-कभी उनके आंकड़े यह दिखाते हैं कि उन्होंने खराब गेंदबाजी की, जबकि उन्होंने उतनी खराब गेंदबाजी नहीं की होती।’
उन्होंने आगे कहा, “मार्जिन बहुत छोटा है। आपको सिर्फ अच्छी जगहों पर गेंदबाजी करनी होती है, क्योंकि पांच फील्डर अंदर हैं, दो नई गेंदें हैं और अब जिस तरह की पावर हिटिंग हो रही है, उसमें गेंदबाजों के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते।”
‘सिर्फ आंकड़े देखकर गेंदबाजों को नहीं आंक सकते’
गंभीर ने बताया कि कोचिंग स्टाफ गेंदबाज के प्रदर्शन का मूल्यांकन किस तरह करता है। उन्होंने कहा, ‘एक कोच और सपोर्ट स्टाफ के तौर पर पहली चीज जो आप देखते हैं, वह यह है कि क्या उन्होंने अपनी गेंदबाजी या अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू किया? अगर उन्होंने ऐसा किया है तो आपको उनके साथ सख्ती नहीं करनी चाहिए।’
उन्होंने कहा, “अगर आप सिर्फ उनके आंकड़े देखकर उनके साथ बहुत सख्ती करेंगे तो हम गेंदबाजों को कभी विकसित नहीं कर पाएंगे। कल्पना कीजिए कि औकिब नबी अपना पहला मैच खेल रहा है। कहीं न कहीं आपको उसे थोड़ा समर्थन देना होगा और उसके लिए थोड़ा अतिरिक्त कुशन या अतिरिक्त विकल्प रखना होगा। लेकिन दुर्भाग्य से आज किसी भी गेंदबाज के लिए कुछ खास नहीं था।”
औकिब नबी को डेब्यू देने के पीछे की रणनीति
गंभीर ने औकिब नबी को डेब्यू देने के फैसले पर भी विस्तार से बात की। भारत ने नितीश कुमार रेड्डी को आराम देकर जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब को मौका दिया। नितीश को भविष्य में हार्दिक पंड्या के बैकअप के तौर पर तैयार किया जा रहा है।
गंभीर के मुताबिक टीम मैनेजमेंट के पास औकिब को अगले मुकाबले में डेब्यू कराने का विकल्प था, लेकिन उस समय मुकाबला सीरीज के लिहाज से ज्यादा दबाव वाला नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘हम औकिब को अगले मैच में भी मौका दे सकते थे, जब वह मुकाबला डेड रबर होता। लेकिन डेड रबर में आपके ऊपर वह दबाव नहीं होता, जो सीरीज जीतने के दबाव में होता है।’
उन्होंने कहा, ‘हम सभी जानते हैं कि वर्ल्ड कप दबाव के बारे में है। क्रिकेट इस तरह नहीं बदलेगा, सिर्फ दबाव अलग होगा, क्योंकि वर्ल्ड कप चार साल में एक बार आता है। इसलिए हम गेंदबाजों को दबाव में डालना चाहते हैं।’
गंभीर ने गूरनूर बराड़ का भी दिया उदाहरण
गौतम गंभीर ने युवा तेज गेंदबाज गूरनूर बराड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि उभरते हुए गेंदबाजों को मुश्किल परिस्थितियों में खेलने का अनुभव देना भारतीय क्रिकेट के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए गूरनूर। अगर गूरनूर को पहले 10 ओवर गेंदबाजी करने दें या डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने दें तो मुझे पता है कि लोग उसके आंकड़ों की बात करेंगे। लेकिन जितना ज्यादा वह मुश्किल परिस्थितियों और कठिन मौकों पर गेंदबाजी करेगा, उतना ही भारतीय क्रिकेट के लिए बेहतर होगा।’
गंभीर ने आगे कहा, ‘आप उसे बीच के ओवरों में गेंदबाजी करा सकते हैं और उसके लिए अच्छे आंकड़े या अच्छे स्टैट्स हासिल कर सकते हैं। आप उसे रक्षात्मक गेंदबाजी करा सकते हैं, लेकिन जितना ज्यादा हम उन्हें ऐसे मौकों पर आजमाएंगे, उतना ही भारतीय क्रिकेट के लिए बेहतर होगा।’
रिकॉर्ड चेज के बावजूद गंभीर का फोकस गेंद-बल्ले के संतुलन पर
भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 406 रन के लक्ष्य का सफल पीछा कर रिकॉर्ड बुक में जगह बनाई। शुभमन गिल के ऐतिहासिक दोहरे शतक और पांच शतकों वाले इस मुकाबले ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया, लेकिन गंभीर का फोकस सिर्फ भारत की जीत पर नहीं रहा।
भारतीय हेड कोच ने साफ किया कि बड़े स्कोर और रिकॉर्ड आकर्षक जरूर हैं, लेकिन क्रिकेट में गेंद और बल्ले के बीच संतुलन भी जरूरी है। उनके मुताबिक ऐसी परिस्थितियां युवा गेंदबाजों के विकास और उनकी सही तरीके से परख के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।






