सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, फर्जी फोन नंबर से रंगदारी वसूलने का मामला

ईओडब्ल्यू और ईडी के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने भी 200 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले सुकेश चंद्रशेखर पर शिकंजा कसा है. सीबीआई ने तमिलनाडु की सीजेएम कोर्ट में महाठग सुकेश चंद्रशेखर और उसके साथी संजय जैन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. फिलहाल सुकेश दिल्ली की जेल में बंद है. दरअसल सीबीआई ने 27 मई 2020 को सुप्रीम कोर्ट के 3 मार्च 2020 आदेश के बाद तमिलनाडु में 25 नवंबर 2019 को चेन्नई पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को टेकओवर करके नया केस दर्ज करके जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया था कि दोनों आरोपी डिजिटल डिवाइस के जरिए चीटिंग करने की साजिश में शामिल थे.

आरोपी सुकेश चंद्रशेखर अक्टूबर 2019 में जब पेरोल पर जेल से बाहर आया था तो उसने स्पूफिंग के जरिए खुद को भारत सरकार का अलग-अलग अधिकारी बताकर उन लोगो को कॉल किया जो अलग-अलग क्रिमिनल केस में जांच एजेंसी के दायरे में थे. इन लोगों को अलग-अलग तरीके से ठगने के लिए इन्हें कॉल किए गए थे.

सीबीआई ने सुकेश चंद्रशेखर और संजय जैन उर्फ संजय चिकन के खिलाफ तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के सीजेएम चेंगलपट्टू के समक्ष चार्जशीट दाखिल की है. सीबीआई ने मई 2020 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर एक मामला दर्ज किया था और 2019 में दर्ज प्राथमिकी की जांच अपने हाथ में ली थी. FIR पुलिस स्टेशन डीसीबी तिरुवल्लूर चेन्नई (तमिलनाडु) में दर्ज की गई थी. बताया जा रहा है कि  विभिन्न एजेंसियों द्वारा जिन लोगों की जांच की जा रही थी, उन लोगों से कथित तौर पर फर्जी फोन नंबर (स्पूफिंग) के जरिए नौ करोड़ रुपये से ज्यादा की रंगदारी वसूलने के मामले में यह आरोप पत्र दायर किया गया है.

जांच के दौरान दोनों आरोपितों की भूमिका सामने आई. आरोपी ने कथित तौर पर डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर ठगी करने की साजिश रची थी. आरोपियों में से एक ने अक्तूबर 2019 के दौरान हिरासत में पैरोल में रहते हुए कथित रूप से अपराध किया था और कॉल स्पूफिंग तकनीकों का उपयोग करके भारत सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी चूना लगाया और विभिन्न व्यक्तियों को फोन किया, जो विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा आपराधिक मामलों का सामना कर रहे थे.

यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने उनके मामलों को निपटाने की आड़ में उनसे रिश्वत के रूप में भारी मात्रा में राशि उगाही की थी और इस तरह एकत्र किए गए धन का अपने निजी उपयोग के लिए दुरुपयोग किया था.

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