दुर्लभ रोगों की आठ दवाएं सौ गुना तक सस्ती होंगी

भारत को छह दुर्लभ बीमारियों की आठ दवाएं तैयार करने में सफलता मिली है. अब तक इन रोगों की दवाओं पर सलाना करोड़ों का खर्च आता था, लेकिन अब चार ऐसी दवाएं देश में बननी शुरू हो गई हैं, जिसके बाद उपचार का खर्च घटकर कुछ लाख रह गया है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सरकार ने उद्योग जगत के साथ 13 दुर्लभ बीमारियों की दवाएं भारत में बनाने का निर्णय लिया था. अब तक चार दवाएं बाजार में उतार दी गई हैं, अन्य चार तैयार हैं, लेकिन वे मंजूरी की प्रक्रिया में हैं. उन्होंने बताया कि यकृत से जुड़ी बीमारी टाइरोसिनेमिया टाइप-1 के इलाज में इस्तेमाल कैप्सूल निटिसिनोन के जरिये एक बच्चे के उपचार का सालाना खर्च 2.2 करोड़ रुपये के करीब आता है. अब इसका सालाना खर्च ढाई लाख रह जाएगा.

गौशर रोग की दवा की कीमतें 60 गुना तक कम हुईं. इसके इलाज का सालाना खर्च 1.8-3.6 करोड़ तक था, वह भारतीय दवा से 3.6 लाख रह गया है. विल्सन रोग की दवा ट्रिएंटाइन पर सालाना उपचार खर्च 2.2 करोड़ है, जो घटकर 2.2 लाख रह जाएगा. लेनोक्स गैस्टरोट सिंड्रोम के उपचार में इस्तेमाल कैनबिडिओल का सालाना खर्च अभी सात से 34 लाख तक आता था. अब देश में बनी दवा से खर्च एक से पांच लाख के बीच रहेगा.

उपचार क्यों महंगा

यह आम बीमारियां नहीं हैं, इसलिए दवा कंपनियां इन्हें कम बनाती हैं. इन्हें लेकर जागरुकता की भी कमी थी और उपचार पर ध्यान नहीं दिया जाता था. सरकार दुर्लभ बीमारी की मदद को साल में अधिकतम 50 लाख रुपये तक की मदद प्रदान करती है.

70 हजार का सीरप 405 में

सिकल सेल रोग की दवा हाइड्रोक्सीयूरिया की टेबलेट देश में बनती है, लेकिन बच्चों को टेबलेट देना मुश्किल होता है. इसका सीरप काफी महंगा है और 100 एमएल की एक बोतल की कीमत करीब 70 हजार रुपये है, लेकिन भारतीय दवा कंपनियों ने इसे महज 405 रुपये में तैयार करने में सफलता हासिल की है. अगले साल मार्च तक यह सीरप बाजार में उपलब्ध हो जाएगा. इससे आम लोगों की पहुंच में इसका इलाज होगा.

क्या हैं दुर्लभ बीमारियां और कितने रोगी

एक हजार में एक से कम व्यक्ति को होने वाली बीमारी को दुर्लभ बीमारी माना जाता है. देश में कितनी दुर्लभ बीमारियां हैं, इसका कोई ठोस आंकड़ा नहीं है, लेकिन देश में 8-10 करोड़ ऐसे रोगी होने का अनुमान है. 80 दुर्लभ बीमारियां आनुवांशिक हैं.

 

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