सदन में उठा सरकारी नौकरी का मसला, गहमागहमी तेज, विपक्ष ने लगाए आरोप

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को प्रश्नकाल में सरकारी नियुक्तियों का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सवाल किया कि 1 जनवरी से 31 जनवरी तक कितने लोगों को नौकरी दी गई? कौशिक ने कहा, सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि 20 हज़ार 291 लोगों को नौकरी दी गई। जबकि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में 2 लाख से ज़्यादा नौकरी देने का ज़िक्र किया था?
नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नौकरी केवल शासकीय नहीं होता, रोज़गार केवल शासकीय नहीं होता। अब तक 20 हज़ार 291 लोगों को सरकारी नौकरी दी गई है, जिसके बाद धरमलाल कौशिक ने कहा, सरकार की नौकरी केवल होर्डिंग्स में दिखाई देती है। कौशिक ने पूछा कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने के लिए 2020 के बाद कमेटी की बैठक नहीं हुई।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सचिवों की कमेटी की बैठक में 9 जनवरी 2020 को हुई थी। कमेटी ने विधि विभाग से अभिमत मांगा गया है। अभिमत अभी अपेक्षित है। 33 विभागों की जानकारी आ गई है। बाक़ी विभागों से जानकारी आनी बाक़ी है।

धरमलाल कौशिक ने कहा, जनघोषणा पत्र में कांग्रेस ने ये वादा किया था कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा, लेकिन तीन साल बीत गए। अब नहीं किया जा सका।
जिसके बाद सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच शोरगुल शुरु हो गया। भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि 2 लाख 80 हज़ार लोगों को नौकरी दी गई है। जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इनके नेता तो ट्रम्प में बिजी थे। नमस्ते ट्रम्प के चक्कर में पूरा देश फंसा। कईयों की जाने गई लेकिन छत्तीसगढ़ में हम रोज़गार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। सरकार गंभीर है। सरकार ने कमेटी बनाई है, कमेटी की अनुशंसा के आधार पर कार्यवाही की जाएगी।

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