छत्तीसगढ़ में आरक्षण पर सियासी जंग, सीएम ने रमन सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 58% आरक्षण रिवर्ट करने के बाद से भाजपा-कांग्रेस में जमकर जुबानी जंग चल रही है. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सहित भाजपा नेताओं ने भूपेश सरकार पर बढ़े आरक्षण को बचाने वकील नहीं खड़ा करने का आरोप लगाया. सीएम भूपेश बघेल और कांग्रेसियों का कहना कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देना चाहती है. इस पर काम भी कर रहे हैं. भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व डॉ. रमन सिंह को लगातार पीछे ढकेल रहा है और नये लोगों को सामने ला रहे हैं. रमन सिंह का यहीं रहना हमारे लिए लाभदायक है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर कहें तो उन्हें राजनीतिक भविष्य के लिए राज्यपाल बन जाना चाहिए.

पंडरिया विधानसभा में भेंट-मुलाकात से लौटे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर आरक्षण को लेकर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि 2005 में भारत सरकार का आदेश आ गया था कि अनुसूचित जाति, जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए, लेकिन रमन सिंह 2011 तक इस पर रोक लगाकर रखे थे.

2011 में जब आंदोलन हुआ तो 2012 में एक नोटिफिकेशन जारी किया. उसके बाद लोग न्यायालय गए तो राज्य सरकार ने स्टे ले लिया. 2018 तक उनके पास मौका था, लेकिन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी, उसकी रिपोर्ट न्यायालय में नहीं रख पाए. ननकीराम कंवर की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी, उस रिपोर्ट को भी न्यायालय में जमा नहीं किया गया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश में अनुपात के आधार पर आरक्षण की बात की थी. जिसका जितना अधिकार है, उसको उतना मिलना चाहिए. इसके लिए हमारी सरकार प्रयास भी कर रही है. अभी जिस प्रकार से मंडल आयोग की सिफारिश है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत मिलना चाहिए, वह मिले. एससी की जनसंख्या 13 प्रतिशत है तो उसे उतना मिले, एसटी की आबादी 32 प्रतिशत है तो उसे उसके हिसाब से मिले.

सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की बात कही है. जिसका जितना हक है वह मिलना चाहिए. उसके लिए हम प्रयास भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों के पास मुद्दा नहीं है. वो सिर्फ राजनीति कर रहे हैं. बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में स्थानीय निवासियों का 100% आरक्षण खत्म होने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोर्ट ने अधिसूचना को रद्द किया है. सरकार बस्तर और सरगुजा संभागों में आदिवासियों का ख्याल रखेगी. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछले दिनों प्रदेश सरकार की अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए आरक्षण रद्द कर दिया है.

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